देहरादून। उत्तराखंड राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने पर मनाए जा रहे रजत जयंती वर्ष के अवसर पर बुधवार शाम मुख्यमंत्री आवास में आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला। जूना पीठाध्यक्ष, शंकराचार्य के प्रतिनिधि, अनेक अखाड़ों से जुड़े प्रमुख संतों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर राज्य के उज्ज्वल भविष्य और समृद्धि के लिए आशीर्वाद प्रदान किया।
मुख्यमंत्री ने इस दौरान संत समाज का स्वागत करते हुए कहा कि उत्तराखंड सदियों से धर्म, संस्कृति और अध्यात्म का केंद्र रहा है और हिमालयी परंपराओं की यह विरासत आगे भी जन-जन में प्रेरणा का संचार करती रहेगी।
संतों ने उत्तराखंड को अध्यात्मिक पर्यटन का विश्व केंद्र बनाने और सनातन संस्कृति के संरक्षण के लिए सरकार के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि देवभूमि की पहचान उसके मंदिरों, आश्रमों और आध्यात्मिक धरोहरों से है, जिन्हें संरक्षित करने की आवश्यकता है।
राज्य सरकार ने हाल में बदरीनाथ–केदारनाथ समेत चारधाम में कई विकास कार्य शुरू किए हैं, जिससे तीर्थयात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। इसी क्रम में संतों ने भी धार्मिक स्थलों के संरक्षण को लेकर विभिन्न सुझाव दिए।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि “उत्तराखंड धर्म, संस्कृति और विकास के समन्वय के पथ पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।” उन्होंने संत समाज का आभार जताते हुए देवभूमि के सर्वांगीण विकास का संकल्प दोहराया।







