रुद्रप्रयाग ज़िले में बधाणीताल से भुनाल गांव (भेडारू) तक प्रस्तावित 9 किलोमीटर मोटरमार्ग के निर्माण की मांग को लेकर क्षेत्रीय ग्रामीणों ने अपनी आवाज तेज कर दी है। इसी मांग को लेकर लोक निर्माण विभाग कार्यालय में आमरण अनशन पर बैठे तीन बुजुर्ग ग्रामीणों में से दो की तबीयत गुरुवार सुबह बिगड़ गई, जिसके बाद प्रशासन और लोनिवि विभाग में हड़कंप मच गया।
स्वास्थ्य बिगड़ने पर मंगाई गई 108 एंबुलेंस, ग्रामीणों ने जाने से किया इंकार
6 नवंबर की सुबह जब चिकित्सकों की टीम ने अनशनकारियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया, तो उनका वजन कम होने के साथ ही शुगर लेवल भी बेहद कम पाया गया। स्थिति गंभीर देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम ने तुरंत 108 एंबुलेंस को मौके पर बुलाया।
लेकिन अनशनकारी बुजुर्गों ने साफ कह दिया कि जब तक विधायक, डीएम और डीएफओ मौके पर नहीं आएंगे, वे अनशन स्थल नहीं छोड़ेंगे।
प्रशासन ने दी आश्वासन, ग्रामीणों ने आंदोलन स्थगित किया
स्थिति को गंभीर देखते हुए विधायक भरत सिंह चौधरी, डीएम प्रतीक जैन और डीएफओ रजत सुमन अनशन स्थल पर पहुंचे। बातचीत के दौरान डीएम प्रतीक जैन ने स्पष्ट आश्वासन दिया कि—
“तीन दिनों के भीतर फॉरेस्ट क्लीयरेंस के लिए फाइल शासन को भेज दी जाएगी।”
आश्वासन मिलने के बाद अनशन पर बैठे बुजुर्ग ग्रामीणों को जूस पिलाकर आमरण अनशन को फिलहाल स्थगित कर दिया गया।
कई वर्षों से लंबित है ग्रामीणों की मांग
3 नवंबर 2025 से शुरू इस अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के पीछे ग्रामीणों का कहना है कि—
“बधाणीताल से भुनाल गांव तक सड़क बनने से क्षेत्र का विकास होगा और लोगों को आने-जाने में राहत मिलेगी। लेकिन वर्षों से यह मांग केवल फाइलों में धूल फांक रही है।”
यह मार्ग क्षेत्र में स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका और आपदा के समय राहत पहुंचाने में महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा।
विकास कार्यों पर निगाहें
अब ग्रामीणों की नजरें प्रशासन की ओर हैं कि क्या तय समयसीमा में फॉरेस्ट क्लीयरेंस की प्रक्रिया आगे बढ़ती है या नहीं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि वादे पूरे नहीं हुए तो आंदोलन फिर से तेज किया जाएगा।







