देहरादून: उत्तराखंड राज्य स्थापना के रजत जयंती समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरी तरह उत्तराखंडी रंग में नजर आए। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत गढ़वाली भाषा में करते हुए कहा—
“देवभूमि उत्तराखंड का मेरा भाई-बंधु, दीदी-भूली- दाणा स्यांणा, आप सब्यूथैं म्यार नमस्कार।”
करीब 29 मिनट के भाषण में उन्होंने दो बार गढ़वाली में जनता से संवाद किया और राज्य आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि दी। साथ ही 25 वर्षों की उल्लेखनीय प्रगति का विस्तृत उल्लेख किया।
✅ 25 सालों की विकास यात्रा
प्रधानमंत्री ने कहा—
“25 साल पहले साधन कम थे, बजट छोटा था, लेकिन आज उत्तराखंड नई बुलंदियों को छू रहा है।”
उन्होंने बताया—
- बजट 4,000 करोड़ से बढ़कर 1 लाख करोड़+
- बिजली उत्पादन 4 गुना बढ़ा
- सड़कों की लंबाई दोगुनी
- 1 से 10 मेडिकल कॉलेज
गढ़वाली में उन्होंने कहा—
“पैली पहाड़ौं की चढ़ै विकासै बाढ़ रोक देंद छै, अब वखी बटी नई बाट खुलन लगी।”
✅ लोकल उत्पादों और ब्रांडिंग को मिला बढ़ावा
पीएम मोदी ने स्थानीय उत्पादों पर जोर देते हुए कहा—
“लोकल ही हमारी परंपरा, पहचान और अर्थव्यवस्था की असली ताकत है।”
उन्होंने बदरी गाय के घी का उदाहरण देते हुए बताया कि इसे जीआई टैग मिलना राज्य की बड़ी सफलता है।
उन्होंने ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड की सराहना करते हुए कहा कि यह—
✅ उत्तराखंडी उत्पादों को ग्लोबल मार्केट तक ले जा रहा है
✅ बेडू जैसे फल देशभर के बाजारों तक पहुंच रहे हैं
✅ उत्तराखंड की आध्यात्मिक शक्ति
प्रधानमंत्री ने कहा—
“देवभूमि भारत की आध्यात्मिक धड़कन है।”
“उत्तराखंड स्पिरिचुअल कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड बन सकता है।”
चारधाम, जागेश्वर, आदि कैलाश जैसे पवित्र स्थलों का जिक्र करते हुए उन्होंने राज्य की धार्मिक महत्ता को रेखांकित किया।
✅ Vibrant Village योजना से बदलेगी सीमांत क्षेत्रों की तस्वीर
पीएम मोदी ने कहा—
“अब विदेश व देश से आने वाले पर्यटक सीमांत गांवों की संस्कृति और जीवन को नजदीक से जान पाएंगे।”
उन्होंने विशेष रूप से डुबके, चुड़कानी, रोट, अरसा और झंगोरे की खीर जैसे व्यंजनों का उल्लेख किया।
✅ गढ़वाली संबोधन ने बढ़ाया जुड़ाव
स्थानीय भाषा और संस्कृति को सम्मान देते हुए प्रधानमंत्री का यह संबोधन दर्शकों को खूब भाया।
समारोह स्थल पर लोग तालियों और नारों से उत्साह व्यक्त करते दिखे।
स्थानीय कनेक्ट और विकास की बातों ने पीएम मोदी के भाषण को खास बना दिया।







