विकासनगर:उत्तराखंड के देहरादून जिले के जौनसार बावर क्षेत्र के खत दसऊ गांव में करीब ढाई साल से विराजमान छत्रधारी चालदा महासू महाराज की डोली सोमवार 8 दिसंबर को विधि-विधान के साथ मंदिर के गर्भगृह से बाहर निकाली गई। इसके साथ ही महाराज की प्रवास यात्रा का विधिवत शुभारंभ हो गया। मंगलवार 9 दिसंबर को महाराज दसऊ गांव में ही बागड़ी एक परिवार के यहां विश्राम करेंगे।
इसके बाद 10 दिसंबर को महाराज की डोली भूपऊ गांव पहुंचेगी, जहां बागड़ी एक परिवार के यहां विश्राम के बाद आगे की यात्रा के लिए प्रस्थान करेगी। श्रद्धालुओं में इस पावन यात्रा को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है।
13 दिसंबर को छत्रधारी चालदा महासू महाराज हिमाचल प्रदेश के द्राविल गांव में बागड़ी विश्राम करेंगे। इसके बाद 14 दिसंबर को महाराज हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के पश्मी गांव में नवनिर्मित मंदिर में विधि-विधान के साथ विराजमान होंगे।
सोमवार को सिरमौर जिले के पश्मी गांव से चालदा महाराज के बुलावे पर करीब छह लोग दसऊ गांव पहुंचे। इस दौरान गांव में वाद्य यंत्रों, ढोल-दमाऊ और फूल मालाओं के साथ उनका जोरदार पारंपरिक स्वागत किया गया। पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल बना रहा।
चलायमान देवता हैं चालदा महासू महाराज
छत्रधारी चालदा महासू महाराज चार महासू देवताओं में सबसे छोटे माने जाते हैं और उन्हें चलायमान देवता के रूप में पूजा जाता है। लोगों में महासू देवता के प्रति अटूट आस्था और गहरा विश्वास है। देव दर्शन के लिए श्रद्धालु दूर-दूर से भारी संख्या में पहुंचते हैं।
चार महासू देवताओं के बजीर दीवान सिंह राणा ने बताया कि महाराज की एक वर्ष की प्रवास यात्रा हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के पश्मी गांव में रहेगी। उसके बाद चालदा महासू महाराज पुनः जौनसार बावर क्षेत्र के जगथान में विराजमान होंगे।
14 दिसंबर को नवनिर्मित मंदिर में होंगे विराजमान
शेर सिंह ने बताया कि चालदा महाराज चलायमान देवता हैं, जिनकी प्रवास यात्रा दसऊ गांव से प्रारंभ हो चुकी है। आगामी 14 दिसंबर को महाराज सिरमौर (हिमाचल प्रदेश) के पश्मी गांव में स्थित नवनिर्मित मंदिर में विधिवत रूप से विराजमान होंगे।
गौरतलब है कि महासू देवता चार भाइयों का सामूहिक नाम है, जिनमें बाशिक, पवासी, बौठा और चालदा महाराज शामिल हैं। जौनसार बावर के साथ-साथ उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कई क्षेत्रों में महासू देवता की गहरी धार्मिक मान्यता है। महाराज की इस प्रवास यात्रा को लेकर पूरे क्षेत्र में धार्मिक उल्लास और आस्था का माहौल बना हुआ है।







