देहरादून में नर्सिंग भर्ती प्रक्रिया को पूर्व की तरह वर्षवार लागू किए जाने समेत विभिन्न मांगों को लेकर नर्सिंग बेरोजगार अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है। गुरुवार को आंदोलन के सातवें दिन अभ्यर्थियों ने स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत के सरकारी आवास की ओर कूच किया।
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों के समर्थन में पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने अभ्यर्थियों की मांगों को जायज बताते हुए कहा— “नर्सिंग अभ्यर्थियों को आंदोलन करते हुए सात दिन हो गए, लेकिन सरकार ने अभी तक उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया है। सरकार को नर्सिंग भर्ती प्रक्रिया को वर्षवार करना चाहिए, जिससे नर्सिंग का कोर्स कर चुके बेरोजगार युवाओं को रोजगार के अवसर मिल सकें, लेकिन सरकार ऐसा नहीं कर रही है।”
हरक सिंह रावत ने यह भी बताया कि “इनकी लड़ाई मैं व्यक्तिगत रूप से लड़ रहा हूं। आवास घेराव से पहले मैंने स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत से फोन पर बातचीत की। उन्होंने कहा कि वह इस समय पश्चिम बंगाल में हैं और 18 तारीख को देहरादून लौट रहे हैं। उन्होंने आश्वस्त किया है कि बेरोजगार अभ्यर्थियों की मांगों पर बैठकर बातचीत की जाएगी।”
इससे पहले अभ्यर्थी बिंदाल पुल पर एकत्र हुए और हरक सिंह रावत के नेतृत्व में पैदल मार्च करते हुए मंत्री आवास की ओर बढ़े। लेकिन यमुना कॉलोनी के मुख्य द्वार पर पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक दिया, जिसके बाद सभी बेरोजगार सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। अभ्यर्थियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
नर्सिंग एकता मंच के अध्यक्ष नवल पुंडीर ने कहा कि वर्तमान नर्सिंग भर्ती विज्ञप्ति और पोर्टल को तत्काल बंद किया जाए तथा भर्ती प्रक्रिया को फिर से ईयरली-वाइज लागू किया जाए। उन्होंने उत्तराखंड मूल निवासियों को प्राथमिकता देने और आयु सीमा पार कर चुके अभ्यर्थियों को विशेष आयु छूट देने की भी मांग उठाई।
बीते दिनों का विवाद भी बना पृष्ठभूमि
बता दें कि 8 दिसंबर को भी नर्सिंग बेरोजगारों ने मुख्यमंत्री आवास कूच किया था। पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोका था। इस दौरान गहमा-गहमी में एक नर्सिंग बेरोजगार छात्रा को एक पुलिसकर्मी ने थप्पड़ मार दिया था, जिसके बाद दोनों के बीच हाथापाई भी हो गई थी। इस घटना के बाद नर्सिंग एकता मंच के साथ महिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पुलिस मुख्यालय का घेराव किया था।
अभ्यर्थियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, उनका आंदोलन जारी रहेगा।







