रामनगर। पूर्व सैनिक विभाग उत्तराखंड कांग्रेस की ओर से अग्निपथ योजना के विरोध में रविवार को पीरूमदारा क्षेत्र में हस्ताक्षर रैली यात्रा का आयोजन किया गया। यह रैली पीरूमदारा मुख्य चौराहे से शुरू होकर कटियापुल रोड, शांतिकुंज, बद्री विहार, साईं मंदिर होते हुए काशीपुर रोड से वापस पीरूमदारा मुख्य चौराहे पर समाप्त हुई। रैली में बड़ी संख्या में पूर्व सैनिकों, कांग्रेस कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया।
रैली के दौरान अग्निपथ योजना के विरोध में जोरदार नारेबाजी की गई और आमजन से हस्ताक्षर कर अभियान को समर्थन देने की अपील की गई। इस मौके पर पूर्व सैनिक विभाग उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष कर्नल राम रतन नेगी (सेवानिवृत्त) और कांग्रेस के पूर्व विधायक रणजीत रावत विशेष रूप से मौजूद रहे।
रैली को संबोधित करते हुए पूर्व विधायक रणजीत रावत ने कहा कि कांग्रेस पार्टी शुरू से ही अग्निवीर योजना का विरोध करती आ रही है। उन्होंने कहा कि सड़क से लेकर सदन तक कांग्रेस ने इस योजना के खिलाफ आवाज बुलंद की है। गढ़वाल मंडल में पहले ही हस्ताक्षर अभियान चलाया जा चुका है, जबकि कुमाऊं मंडल का पहला चरण रामनगर के पीरूमदारा क्षेत्र से शुरू किया गया है, जिसे आगे पूरे क्षेत्र में विस्तार दिया जाएगा।
रणजीत रावत ने कहा कि उत्तराखंड देश को सबसे अधिक सैनिक देने वाला राज्य है। यहां के युवा हर रेजीमेंट में सेवा दे रहे हैं, लेकिन अग्निपथ योजना के माध्यम से सैनिकों के सम्मान, रोजगार और भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अग्निवीरों को शहीद होने पर भी पूर्ण शहीद का दर्जा नहीं मिलेगा, जो सैनिकों के मान-सम्मान पर सीधा प्रहार है।
वहीं, कर्नल राम रतन नेगी ने कहा कि जून 2022 में बिना व्यापक चर्चा के अग्निपथ योजना लागू की गई, जिसके तहत युवाओं को केवल चार वर्षों के लिए सेना में भर्ती किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस योजना के अंतर्गत चार साल बाद सिर्फ 25 प्रतिशत जवानों को ही आगे सेवा में रखा जाएगा, जबकि 75 प्रतिशत युवाओं को बिना पेंशन, ग्रेच्युटी, सीएसडी और मेडिकल सुविधाओं के घर भेज दिया जाएगा। इतना ही नहीं, चार साल की सेवा के बावजूद उन्हें पूर्व सैनिक का दर्जा भी नहीं मिलेगा।
कर्नल नेगी ने सवाल उठाया कि जब एक जवान को पहले से यह पता होगा कि उसे चार साल बाद सेवा से बाहर कर दिया जाएगा, तो वह देश की सुरक्षा के लिए किस मानसिकता से कार्य करेगा। उन्होंने इस योजना को देश की सुरक्षा, युवाओं के भविष्य और सैन्य परंपराओं के साथ धोखा करार देते हुए स्पष्ट मांग की कि अग्निपथ योजना को तत्काल रद्द किया जाए, पुरानी भर्ती प्रक्रिया को बहाल किया जाए और वर्तमान अग्निवीरों को स्थायी किया जाए।







