देश में इन दिनों संसद से पारित वीबी-जी राम जी बिल 2025 को लेकर सियासी माहौल गरमाया हुआ है। जहां कांग्रेस इस विधेयक का विरोध कर रही है, वहीं भारतीय जनता पार्टी इसे ग्रामीण विकास और रोजगार के लिहाज से ऐतिहासिक कदम बता रही है। ऐसे में आपदा-संवेदनशील और विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले उत्तराखंड पर इस बिल का क्या असर पड़ेगा, इसे लेकर राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री गणेश जोशी ने सोमवार को प्रेस वार्ता कर विस्तृत जानकारी दी।
ग्रामीण विकास मंत्री गणेश जोशी ने बताया कि विकसित भारत–रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) यानी वीबी-जी राम जी बिल 2025 उत्तराखंड के लिए कई मायनों में बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने इस योजना की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वर्ष 1989 में जवाहर रोजगार योजना की शुरुआत हुई थी, जिसे बाद में 2001 में सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना में सम्मिलित किया गया। इसके बाद 2006 में नरेगा और वर्ष 2009 में इसे महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के रूप में लागू किया गया।
उन्होंने कहा कि अब इस योजना को संशोधित कर ग्रामीणों के हित में और अधिक प्रभावशाली बनाया गया है। पुराने प्रावधानों की तुलना करते हुए गणेश जोशी ने बताया कि जहां पहले 100 दिन की रोजगार गारंटी दी जाती थी, वहीं अब इसे बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। साथ ही, पहले जहां सीमित कार्यों की अनुमति थी, अब योजना के तहत ग्राम पंचायतों में स्थायी परिसंपत्ति निर्माण, जल संरक्षण, ग्रामीण आधारभूत ढांचे का विकास, आजीविका संवर्धन और खेती से जुड़े कार्यों को भी शामिल किया गया है।
ग्रामीण विकास विभाग के अनुसार उत्तराखंड में 10.10 लाख जॉब कार्ड धारक परिवार पंजीकृत हैं, जिनमें से 6.71 लाख परिवार सक्रिय हैं। वहीं कुल 16.15 लाख श्रमिक जॉब कार्ड धारक हैं, जिनमें से 9.35 लाख श्रमिक सक्रिय हैं। चालू वित्तीय वर्ष में देशभर के लिए प्रस्तावित 1.51 लाख करोड़ रुपये में से उत्तराखंड के लिए 840 करोड़ रुपये की धनराशि तय की गई है।
इस मौके पर सचिव ग्राम्य विकास एवं आयुक्त ग्राम्य विकास अनुराधा पाल ने बताया कि योजना में हिमालयी और आपदा प्रभावित राज्यों को विशेष राहत दी गई है। उत्तराखंड सहित हिमालयी राज्यों के लिए केंद्र और राज्य के बीच 90:10 का फंडिंग अनुपात रखा गया है। साथ ही, बढ़ती आपदाओं को देखते हुए योजना में रिटेनिंग वॉल और फॉरेस्ट फायर से जुड़े कार्यों को भी जोड़ा गया है।
अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि खेती के व्यस्त समय, जैसे बुवाई और कटाई के दौरान, राज्य सरकार साल में 60 दिन ऐसे तय करेगी, जिनमें योजना के तहत कोई कार्य नहीं कराया जाएगा, ताकि कृषि कार्य प्रभावित न हों।
ग्रामीण विकास आयुक्त अनुराधा पाल ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य वर्ष 2047 तक सशक्त और समृद्ध ग्रामीण भारत का निर्माण करना है। योजना में जल जीवन मिशन के कार्यों के रखरखाव का प्रावधान है, वहीं नियमों के उल्लंघन पर 10 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान भी रखा गया है।







