पिथौरागढ़। सीमांत जिला पिथौरागढ़ में सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण चीन सीमा को जोड़ने वाले टनकपुर–तवाघाट राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) के चौड़ीकरण की प्रक्रिया तेज हो गई है। इसी क्रम में सड़क की जद में आ रहे करीब 480 मकान, दुकानें और गौशालाएं ध्वस्त किए जाने हैं। स्थानीय प्रशासन की ओर से नोटिस जारी होते ही प्रभावित इलाकों में हड़कंप मच गया है। भवन स्वामियों और व्यापारियों ने प्रशासन से कम से कम दो से तीन माह की मोहलत देने की मांग की है।
टनकपुर–तवाघाट एनएच का चौड़ीकरण कार्य चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है। टनकपुर से पिथौरागढ़ तक लगभग 150 किलोमीटर सड़क को ऑल वेदर रोड के रूप में विकसित किया जा चुका है। पिथौरागढ़ से बलुवाकोट तक करीब 70 किलोमीटर हिस्से में भी सड़क चौड़ीकरण का काम पूरा हो गया है। इस दौरान सतगढ़ और गुड़ौली क्षेत्र में लगभग 500 मीटर हिस्से में पहाड़ी कटिंग की जानी है। वहीं बलुवाकोट के बिन्या गांव से तवाघाट तक करीब 35 किलोमीटर सड़क में अब चौड़ीकरण किया जाना शेष है। धारचूला से तवाघाट की ओर फिलहाल कार्य प्रगति पर है।
बलुवाकोट से धारचूला तक घनी आबादी होने के कारण मुआवजे की प्रक्रिया के चलते चौड़ीकरण का कार्य लंबे समय से रुका हुआ था। अब मुआवजा वितरण के बाद प्रशासन ने नोटिस जारी कर सड़क निर्माण में बाधा बन रहे मकानों और दुकानों को हटाने का अल्टीमेटम दिया है। प्रभावितों का कहना है कि प्रशासन की ओर से उन्हें महज एक सप्ताह के भीतर मकान और दुकानें खाली करने के निर्देश दिए गए हैं, जो बेहद कम समय है।
प्रभावित भवन स्वामियों और दुकानदारों का कहना है कि अभी सभी परिवारों को पूरा मुआवजा नहीं मिला है। ऐसे में इतने कम समय में घर और कारोबार समेटना संभव नहीं है। लोगों ने प्रशासन से कम से कम दो से तीन माह का समय देने की मांग की है, ताकि वे वैकल्पिक व्यवस्था कर सकें।
इस मामले पर पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी आशीष भटगांई ने बताया कि नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। उनके अनुसार सभी प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिया जा चुका है, हालांकि यदि कोई परिवार मुआवजे से वंचित रह गया है तो संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया जाएगा कि उन्हें भी जल्द मुआवजा दिया जाए। डीएम ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग का विस्तारीकरण कार्य शीघ्र पूरा करना जरूरी है, इसी को देखते हुए अधिकारियों को कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन के अनुसार बलुवाकोट के बिन्या गांव से तवाघाट तक 35 किलोमीटर लंबे एनएच में कुल 480 भवन प्रभावित हैं। इनमें मकान, दुकानें और गौशालाएं शामिल हैं। इनमें से अधिकांश भवन आंशिक रूप से ध्वस्त किए जाएंगे। प्रभावित भवन स्वामियों को कुल करीब 90 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि दी जानी है, जिसमें से अब तक लगभग 70 करोड़ रुपये वितरित किए जा चुके हैं, जबकि 20 करोड़ रुपये का भुगतान अभी किया जाना बाकी है।
कालिका, छारछुम समेत अन्य कस्बों में सड़क चौड़ीकरण के लिए प्रशासन ने एक सप्ताह के भीतर मकान और दुकानों को खाली करने का अल्टीमेटम दिया है। इस फैसले से स्थानीय लोगों और व्यापारियों में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि इतनी कम अवधि में स्थान खाली करना व्यावहारिक नहीं है।
हालांकि कुछ भवन स्वामी स्वयं आगे बढ़कर मकान के आंशिक हिस्से को तोड़ने का काम शुरू कर चुके हैं। स्थानीय निवासी एसएस दताल ने बताया कि उनके भवन का लगभग चार फीट हिस्सा सड़क की जद में आ रहा था। उन्हें मुआवजा मिल चुका है, जिसके बाद उन्होंने मजदूर लगाकर स्वयं वह हिस्सा हटवा दिया है।
फिलहाल टनकपुर–तवाघाट राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण को लेकर प्रशासन और प्रभावितों के बीच समन्वय बनाने की कोशिशें जारी हैं, ताकि सामरिक रूप से महत्वपूर्ण इस सड़क परियोजना को समय पर पूरा किया जा सके और प्रभावित लोगों को भी पर्याप्त राहत मिल सके।







