हरिद्वार: उत्तराखंड के हरिद्वार जिले से प्रदेश की पहली क्लाउड किचन योजना की शुरुआत कर महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक नई पहल की गई है। इस योजना के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं अब ‘गंगा रसोई’ के नाम से क्लाउड किचन और विशेष कैंटीन सेवा शुरू करने जा रही हैं।
हरिद्वार के ग्रामीण विकास इनक्यूबेटर केंद्र में महिलाओं को दी गई 6 दिवसीय क्लाउड किचन प्रशिक्षण का सफल समापन हो गया है। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को कम बजट में घर से किचन संचालन, भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता, पैकेजिंग और ग्राहकों तक भोजन पहुंचाने से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं, ताकि वे शुद्ध, साधारण और पौष्टिक भोजन परोसकर आत्मनिर्भर बन सकें।
समापन कार्यक्रम में मुख्य विकास अधिकारी ललित नारायण मिश्रा ने प्रशिक्षण प्राप्त कर रही महिलाओं को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि सभी महिलाओं ने कड़ी मेहनत और लगन से क्लाउड किचन का प्रशिक्षण प्राप्त किया है। अब वे अपने किचन से ही खाना तैयार कर उपभोक्ताओं को उनका मनपसंद भोजन उपलब्ध करा सकेंगी। इससे महिलाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और उनकी आर्थिकी भी मजबूत होगी।
मुख्य विकास अधिकारी ने बताया कि हरिद्वार प्रदेश का पहला जिला है, जहां महिलाओं को क्लाउड किचन का प्रशिक्षण ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और पीएनबी शताब्दी ग्राम विकास न्यास के सहयोग से दिया गया है। उन्होंने कहा कि जिले में कई औद्योगिक क्षेत्र और शैक्षिक संस्थान संचालित हैं, जहां काम करने वाले लोगों और अध्ययनरत छात्रों को घर जैसा और मनपसंद भोजन उपलब्ध कराया जा सकेगा। इसके लिए सिडकुल और उद्योग विभाग के अधिकारी सभी महिलाओं को पूर्ण सहयोग प्रदान करेंगे। क्लाउड किचन में कार्य कर रही महिलाओं की पहचान ‘गंगा रसोई’ के नाम से होगी।
इस अवसर पर लीड बैंक मैनेजर दिनेश गुप्ता ने कहा कि मुख्य विकास अधिकारी के निर्देशन में महिलाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया है। उन्होंने महिलाओं को आश्वस्त किया कि क्लाउड किचन शुरू करने के लिए बैंक की ओर से ऋण उपलब्ध कराने में पूरा सहयोग दिया जाएगा।
उधर, रोजगार से जुड़ी यह ट्रेनिंग मिलने के बाद लाभार्थी महिलाएं भी उत्साहित नजर आईं। महिलाओं का कहना है कि अब उन्हें स्वरोजगार की दिशा में अपना उज्ज्वल भविष्य दिखाई दे रहा है। इसके लिए उन्हें बाहर नहीं जाना पड़ेगा, बल्कि वे घर से ही अपना व्यवसाय शुरू कर आत्मनिर्भर बन सकेंगी। प्रशासन का मानना है कि ‘गंगा रसोई’ योजना महिला स्वावलंबन की दिशा में एक प्रभावी मॉडल साबित होगी।







