देहरादून। उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर प्रदेश की सियासत के केंद्र में आ गया है। चारों ओर मामले की सीबीआई जांच की मांग उठ रही है। हालांकि, फिलहाल राज्य सरकार ने सीबीआई जांच की घोषणा नहीं की है, लेकिन उससे पहले एक बड़ा मास्टर स्ट्रोक खेलते हुए पौड़ी जिले में स्थित राजकीय नर्सिंग कॉलेज डोभ (श्रीकोट) का नाम परिवर्तित कर दिया गया है। अब यह संस्थान ‘स्व. अंकिता भंडारी राजकीय नर्सिंग कॉलेज डोभ (श्रीकोट), पौड़ी’ के नाम से जाना जाएगा।
राजकीय नर्सिंग कॉलेज डोभ का नाम हुआ परिवर्तित
इस संबंध में चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार की ओर से गुरुवार को शासनादेश जारी कर दिया गया है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 16 सितंबर 2023 को ही पौड़ी स्थित इस नर्सिंग कॉलेज का नाम अंकिता भंडारी के नाम पर रखने का ऐलान किया था, जिस पर अब औपचारिक मुहर लगा दी गई है।
दरअसल, बीते रोज मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अंकिता भंडारी के माता-पिता से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने दोहराया कि राज्य सरकार पीड़ित परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है। मुख्यमंत्री ने पीड़िता के माता-पिता की मांगों पर विधि-सम्मत, निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई का भरोसा दिलाते हुए कहा कि अंकिता को न्याय दिलाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
इसके साथ ही गुरुवार यानी 8 जनवरी को मुख्यमंत्री धामी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि राज्य सरकार जल्द ही अंकिता के माता-पिता की मांगों पर निर्णय लेगी। उधर, इस पूरे मामले को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है और सीबीआई जांच की मांग पर अड़ा हुआ है। प्रदेशभर में विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों द्वारा प्रदर्शन भी जारी हैं।
क्या था अंकिता भंडारी मर्डर केस?
अंकिता भंडारी पौड़ी जिले के श्रीकोट डोभ गांव की रहने वाली थी। 19 वर्षीय अंकिता यमकेश्वर ब्लॉक के गंगा भोगपुर स्थित वनंत्रा रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर कार्यरत थी। 18 सितंबर 2022 को अंकिता अचानक लापता हो गई थी। शुरुआत में मामला राजस्व पुलिस के पास गया, बाद में इसे नियमित पुलिस को सौंपा गया।
जांच के दौरान पुलिस को रिसॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य, उसके दोस्त अंकित गुप्ता और मैनेजर सौरभ भास्कर पर शक हुआ। सख्त पूछताछ में तीनों ने अंकिता की हत्या की बात कबूल कर ली। आरोपियों ने बताया कि 18 सितंबर 2022 की देर शाम उन्होंने अंकिता को चीला बैराज की नहर में धक्का दे दिया था। इसके बाद 24 सितंबर 2022 को नहर से अंकिता का शव बरामद हुआ था।
अंकिता का शव मिलने और हत्या की पुष्टि के बाद पूरे उत्तराखंड में भारी आक्रोश देखने को मिला था। जगह-जगह प्रदर्शन हुए थे। लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई। बावजूद इसके, मामले से जुड़े नए दावों और बयानों के बाद एक बार फिर सीबीआई जांच की मांग ने जोर पकड़ लिया है।







