उत्तरकाशी (उत्तराखंड):
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन को शुरू हुए पांच साल से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन सीमांत पर्वतीय जिला उत्तरकाशी में आज भी 51 गांव ऐसे हैं, जहां योजना का लाभ नहीं पहुंच पाया है। अगस्त 2019 में शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य वर्ष 2024 तक “हर घर नल, हर घर जल” पहुंचाना था, मगर तय समय सीमा बीत जाने के बाद भी जिले के कई गांव गंभीर पेयजल संकट से जूझ रहे हैं।
उत्तरकाशी जिले के इन 51 गांवों में ग्रामीणों को आज भी पुराने प्राकृतिक जल स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। कई गांवों में महिलाओं और बुजुर्गों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पैदल लंबी दूरी तय कर पानी ढोना मजबूरी बन गई है। गर्मी के मौसम में कई प्राकृतिक स्रोत सूख जाते हैं, जबकि शीतकाल में पानी जमने से हालात और भी विकट हो जाते हैं।
इन गांवों में जल जीवन मिशन रहा फेल
- डुंडा विकासखंड: हिटाणू, कुमराडू, मंजगांव, ग्योनोटी, खटूखाल
- चिन्यालीसौड़ विकासखंड: खालसी, चिलोट, जोगत तल्ला, जोगत मल्ला
- नौगांव ब्लॉक: खांसी पोंटी, कंडारी, देवराना
- बड़कोट तहसील: क्वाडी, सापेटा, कफनोल, धख्याड, पाली
- पुरोला ब्लॉक: रामा, सौन्दरी, गुंदियाडगांव
- मोरी ब्लॉक: खन्यासी, हलताडी, सुंचनगांव, डाटमीर, डांगनगांव, सिदारी, सिरगा, मसारी, कलाप, सौर, पंव मल्ला, पासा, नानाई, पेटडी, लुदरला, गुराडी, कामरा, देवती, झोटाड़ी, धारा, अदासु, गोकुल, कलीच, बरनाली, मैंजाणी, किरोली, मौंड़ा, चिंवा, बामसू, देवरा, गैंचवान
इन 51 गांवों में जल जीवन मिशन के तहत स्वीकृत योजनाओं की कुल लागत करीब 121 करोड़ 77 लाख रुपये बताई जा रही है। इसके बावजूद अधिकांश योजनाएं या तो शुरू ही नहीं हो पाईं या फिर बीच में अटक गईं। इसकी सबसे बड़ी वजह वन भूमि से जुड़ी स्वीकृतियां हैं। कई गांवों में 90 प्रतिशत तक काम पूरा हो चुका है, लेकिन पाइपलाइन का कुछ हिस्सा वन भूमि में आने के कारण परियोजनाएं अधर में लटकी हुई हैं।
वन स्वीकृति बनी सबसे बड़ी बाधा
उत्तरकाशी जल निगम के अधिशासी अभियंता मधुकांत कोटियाल का कहना है कि जिले के जिन 51 गांवों में जल जीवन मिशन का कार्य पूरा नहीं हो सका है, वहां वन भूमि से जुड़ी आपत्तियां सबसे बड़ी रुकावट बनी हुई हैं। पाइपलाइन बिछाने और अन्य निर्माण कार्यों के लिए वन विभाग की अनुमति आवश्यक है, जिसके लिए संबंधित प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं।
उन्होंने बताया कि कई गांवों में काम आंशिक रूप से हुआ है, लेकिन पूरा नहीं हो सका। करीब 26 गांव ऐसे हैं, जहां अब तक जल जीवन मिशन का काम शुरू भी नहीं हो पाया है। वन विभाग से आवश्यक क्लीयरेंस मिलते ही इन गांवों में कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
तेज़ी की मांग, राजनीति भी गर्म
वहीं, कांग्रेस जिला अध्यक्ष प्रदीप रावत का कहना है कि यदि जल जीवन मिशन का कार्य शीघ्र शुरू नहीं किया गया तो ग्रामीणों को आने वाले समय में और अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि वन स्वीकृति प्रक्रिया में तेजी लाई जाए, ताकि गांवों तक नल से शुद्ध पेयजल पहुंच सके और उन्हें रोजाना पैदल पानी ढोने की मजबूरी से राहत मिल सके।
जल जीवन मिशन से जुड़ी यह देरी न सिर्फ सरकारी दावों पर सवाल खड़े कर रही है, बल्कि पहाड़ के गांवों में आज भी पेयजल की जमीनी हकीकत को उजागर कर रही है।







