देहरादून: उत्तराखंड में राशन कार्डों की ई-केवाईसी को लेकर सरकार की महत्वाकांक्षी योजना अब भी पूरी तरह साकार नहीं हो पाई है। तय समय सीमा बीत जाने के बाद भी प्रदेश में करीब 20 फीसदी राशन कार्ड धारकों की ई-केवाईसी लंबित है, लेकिन सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी पात्र व्यक्ति को राशन से वंचित नहीं किया जाएगा।
बायोमेट्रिक और रेटिना स्कैन से होनी थी पहचान
ई-केवाईसी प्रक्रिया के तहत सीधे लाभार्थी का बायोमेट्रिक सत्यापन या फिर आंख की रेटिना स्कैन के जरिए राशन कार्ड की पहचान सुनिश्चित की जानी थी। इसका उद्देश्य यह था कि केवल वास्तविक लाभार्थी को ही सरकारी योजनाओं का लाभ मिले और उसका नाम सरकार के डिजिटल डाटा में विधिवत दर्ज हो सके।
अभ्यर्थियों की भूमिका भी अहम
खाद्य आपूर्ति विभाग के अनुसार, इस अभियान में लाभार्थियों की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण रही है। सरकार की ओर से लगातार जन-जागरूकता अभियान चलाए गए और पात्र लोगों की मांग पर ई-केवाईसी की समय सीमा दो बार बढ़ाई गई। इसके बावजूद अंतिम तिथि तक विभाग केवल करीब 80 प्रतिशत लक्ष्य ही हासिल कर सका।
मंत्री रेखा आर्या का आश्वासन
खाद्य आपूर्ति मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि जो लोग ई-केवाईसी से छूट गए हैं, उनके मामलों की गहन जांच की जाएगी कि वे किन कारणों से प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि गंभीर बीमारी, दिव्यांगता या बायोमेट्रिक और रेटिना सत्यापन में तकनीकी दिक्कतों के कारण जिन लाभार्थियों को ई-केवाईसी में पहले ही छूट दी गई है, उन्हें राशन मिलने में कोई बाधा नहीं आएगी।
उन्होंने दो टूक कहा कि ऐसे किसी भी पात्र व्यक्ति को राशन से वंचित नहीं किया जाएगा। यदि इसके बावजूद भी कोई योग्य लाभार्थी छूट जाता है, तो राज्य सरकार इस विषय में भारत सरकार से अनुरोध करेगी, ताकि सभी को सरकारी राशन का लाभ मिल सके।
दूरस्थ गांवों में अब भी चुनौती
सरकार ने माना है कि खासकर नेटवर्क विहीन और दूरस्थ गांवों में ई-केवाईसी कराना अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। कनेक्टिविटी की कमी और तकनीकी संसाधनों के अभाव के चलते कई क्षेत्रों में प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। ऐसे में विभाग अब विशेष शिविरों और वैकल्पिक तकनीकी व्यवस्था के जरिए शेष लाभार्थियों की ई-केवाईसी पूरी कराने की दिशा में काम कर रहा है।







