देहरादून। वर्षवार नियुक्ति समेत अन्य मांगों को लेकर नर्सिंग अभ्यर्थियों का आक्रोश सोमवार को खुलकर सामने आया। नर्सिंग एकता मंच के बैनर तले सैकड़ों अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री आवास कूच किया, लेकिन पुलिस ने न्यू कैंट रोड स्थित हाथीबड़कला में बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक दिया। इसके बाद नर्सिंग अभ्यर्थी सड़क पर ही धरने पर बैठ गए और वहीं सभा आयोजित कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
नर्सिंग एकता मंच बीते करीब 45 दिनों से एकता विहार स्थित धरना स्थल पर आंदोलनरत है। मंच ने 19 जनवरी को मुख्यमंत्री आवास कूच के साथ विरोध स्वरूप सामूहिक मुंडन कराने का भी ऐलान किया था। हालांकि, उत्तराखंड की स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. सुनीता टम्टा द्वारा मंच के प्रतिनिधियों को वार्ता के लिए आमंत्रित किए जाने के बाद सामूहिक मुंडन कार्यक्रम को फिलहाल टाल दिया गया।
इस दौरान मंच के प्रदेश अध्यक्ष नवल पुंडीर ने कहा कि नर्सिंग भर्ती पूर्व में भी वर्षवार कराई जाती रही है, ताकि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे और सभी नर्सिंग अभ्यर्थियों को समान अवसर मिल सकें। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में भर्ती प्रक्रिया को वर्षवार नहीं कराया जा रहा है, जो नर्सिंग अभ्यर्थियों के हितों के खिलाफ है। नवल पुंडीर ने मांग उठाई कि लिखित भर्ती विज्ञप्ति को तत्काल निरस्त किया जाए और नर्सिंग भर्ती प्रक्रिया को वर्षवार लागू किया जाए।
नर्सिंग एकता मंच का कहना है कि राज्य में नर्सिंग स्टाफ की भारी कमी बनी हुई है, जिसके कारण स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं। इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। ऐसे में सरकार को नर्सिंग अभ्यर्थियों के भविष्य और राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए। मंच ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी न होने पर आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।
फिलहाल डीजी हेल्थ डॉ. सुनीता टम्टा से हुई बातचीत के बाद सभी नर्सिंग अभ्यर्थी एकता विहार स्थित धरना स्थल लौट गए हैं, जहां आगे की आंदोलन रणनीति तय की जाएगी।
गौरतलब है कि इससे पहले 8 दिसंबर 2025 को भी नर्सिंग एकता मंच उत्तराखंड के बैनर तले सैकड़ों बेरोजगार नर्सिंग अभ्यर्थियों ने सचिवालय कूच किया था। उस दौरान अभ्यर्थियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की भी हुई थी। इसी दौरान एक महिला पुलिसकर्मी द्वारा महिला नर्सिंग अभ्यर्थी को थप्पड़ मारने की घटना सामने आई थी, जिसका कई संगठनों ने कड़े शब्दों में विरोध किया था।







