थराली/चमोली: आपदा के बाद भले ही सरकार और प्रशासन व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के बड़े-बड़े दावे कर रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। सर्दियों की पहली बारिश ने ही सड़कों और नालियों की बदहाल स्थिति को उजागर कर दिया है। थराली नगर क्षेत्र के अपर बाजार वार्ड स्थित भैरव मार्केट के सामने बनी सड़क शुक्रवार की बारिश के बाद शनिवार सुबह तालाब में तब्दील नजर आई, जिससे स्थानीय व्यापारियों और राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
सड़क पर कई इंच पानी जमा हो जाने के कारण लोग मजबूरी में पानी के बीच से वाहन और पैदल आवाजाही करते नजर आए। दुकानों के सामने जलभराव होने से व्यापार ठप रहा और ग्राहकों का आना-जाना भी प्रभावित हुआ।
चार माह बाद भी आपदा का मुआवजा नहीं, नालियां तक नहीं खुली
स्थानीय व्यापारियों ने बताया कि करीब चार माह पूर्व आई आपदा में उनकी दुकानों को भारी नुकसान पहुंचा था। मलबा दुकानों के भीतर तक घुस गया था, जिससे कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ। हैरानी की बात यह है कि आज तक कई व्यापारियों को आपदा मुआवजा नहीं मिल पाया है। वहीं लोक निर्माण विभाग थराली अपनी सड़कों पर बनी कच्ची नालियों तक को दुरुस्त नहीं कर सका, जिसका खामियाजा पहली ही बारिश में सामने आ गया।
नगर प्रशासन और लोनिवि की जवाबदेही पर सवाल
स्थानीय लोगों ने सड़क पर जलभराव की समस्या को लेकर नगर प्रशासन और लोक निर्माण विभाग के आला अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। जलभराव की सूचना मिलने पर नगर पंचायत थराली की अध्यक्ष सुनीता रावत ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और बाद में लोनिवि कार्यालय पहुंचकर बाजार क्षेत्र में समुचित नालियों के निर्माण की मांग उठाई।
लोनिवि थराली के अधिशासी अभियंता ने आश्वासन देते हुए कहा कि फिलहाल तात्कालिक समाधान के तौर पर कच्ची नालियों का निर्माण कराया जाएगा और जल्द ही पक्की नालियों का निर्माण भी किया जाएगा, ताकि भविष्य में इस तरह की समस्या न हो।
भराड़ीसैण में भी हालात बेहाल, 18 घंटे बाद खुला राष्ट्रीय राजमार्ग
वहीं सूबे की ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैण में भी व्यवस्थाओं की पोल खुलती नजर आई। बर्फबारी के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग को करीब 18 घंटे बाद शनिवार दोपहर तक यातायात के लिए खोला जा सका। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग की 108 एंबुलेंस सेवा और गैरसैंण कोतवाली का वाहन भी रास्ते में फंसा रहा, जिससे आपात सेवाओं पर सवाल खड़े हो गए।
पूर्व चेतावनी के बावजूद तैयारी नदारद
दरअसल, मौसम विभाग द्वारा पहले ही बर्फबारी की चेतावनी जारी की जा चुकी थी। इसके बावजूद एनएच विभाग और गैरसैंण प्रशासन समय पर जेसीबी और संसाधनों की व्यवस्था नहीं कर पाया। इस मार्ग से बड़ी संख्या में पर्यटक औली और जोशीमठ की ओर रुख कर रहे थे, जबकि रानीखेत और गैरसैंण आने वाले यात्रियों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
ऊंचाई वाले इलाकों में लगातार बर्फबारी
मौसम विभाग द्वारा प्रदेश में ऑरेंज अलर्ट जारी किए जाने के बाद सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के चलते बदरीनाथ धाम सहित वैली ऑफ फ्लावर्स, हेमकुंड साहिब, चिणाप वैली, द्रोणागिरी-बागनी वैली, नीति वैली, कुंवारी पास और गोरसों ट्रैक रूट में अच्छी बर्फबारी दर्ज की जा रही है। गैरसैंण क्षेत्र में शनिवार सुबह हल्की धूप जरूर खिली, लेकिन कड़ाके की सर्दी और शीतलहर का प्रकोप लगातार बना हुआ है।
पहली ही बारिश और बर्फबारी में सामने आई इन अव्यवस्थाओं ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आपदा प्रबंधन और बुनियादी ढांचे को लेकर प्रशासन की तैयारियां वास्तव में कितनी मजबूत हैं।







