एक ओर जहां पूरा देश 77वां गणतंत्र दिवस हर्षोल्लास के साथ मना रहा था, वहीं दूसरी ओर उत्तरकाशी के धराली क्षेत्र के आपदा पीड़ित ग्रामीण अपनी लंबित मांगों को लेकर धरने पर बैठ गए। धरने की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया और मौके पर एडीएम व एसडीएम पहुंचे, लेकिन ग्रामीणों के साथ वार्ता विफल रही। इसके बाद जिलाधिकारी प्रशांत आर्य स्वयं मौके पर पहुंचे और आंदोलनकारियों से संवाद किया।
जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने ग्रामीणों को 15 दिनों के भीतर उनकी मांगों के निस्तारण का आश्वासन दिया। डीएम के इस आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने अपना धरना स्थगित कर दिया। हालांकि ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि यदि तय समय सीमा में उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो वे जिला कलेक्ट्रेट परिसर में दोबारा धरना देने को मजबूर होंगे।
सोमवार को बड़ी संख्या में धराली गांव के ग्रामीण जिला मुख्यालय पहुंचे और काली कमली धर्मशाला में एकत्र होकर सभा की। इसके बाद सरकार के खिलाफ रैली निकालने का निर्णय लिया गया, लेकिन उससे पहले प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और समझा-बुझाकर आंदोलन को समाप्त कराया।
ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से सरकार से अपनी मांगों के निस्तारण की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी अनदेखी की जा रही है। आपदा पीड़ितों ने मलबे में दबे प्राचीन पौराणिक कल्प केदार मंदिर के पुनः जीर्णोद्धार के साथ ही आपदा प्रभावित परिवारों को शीघ्र राहत देने की मांग उठाई।
आंदोलनकारियों ने बताया कि आपदा में कई लोगों के घर पूरी तरह तबाह हो चुके हैं, इसलिए उन्हें तत्काल पुनर्वास नीति के तहत सुरक्षित स्थानों पर बसाया जाए। वहीं जिन लोगों के होटल, दुकानें और अन्य व्यवसाय नष्ट हो गए हैं, उन्हें उचित मुआवजा और आजीविका के लिए भूमि उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे दोबारा अपने पैरों पर खड़े हो सकें।
इसके साथ ही आपदा के मलबे में दबे दोपहिया और चारपहिया वाहनों के लिए समय पर मुआवजा, पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त दुकानदारों को पूरा मुआवजा और किरायेदारों को भी उनके नुकसान का मुआवजा देने की मांग की गई। धराली के लघु एवं सीमांत किसानों ने आपदा को देखते हुए मानवीय आधार पर कृषि ऋण माफी की भी मांग रखी।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र उनकी मांगों का निस्तारण नहीं किया गया तो वे जिला कलेक्ट्रेट परिसर में अनिश्चितकालीन धरना देंगे। वहीं जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने सभी मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए 15 दिनों में समाधान का भरोसा दिलाया, जिसके बाद ग्रामीणों ने धरना समाप्त कर दिया।
गौरतलब है कि बीते वर्ष 5 अगस्त 2025 को उत्तरकाशी जिले के धराली में भीषण आपदा आई थी। इस आपदा में धराली बाजार पूरी तरह तबाह हो गया था और पूरा बाजार करीब 30 से 40 फीट मलबे में दब गया था। हादसे में 50 से अधिक लोग लापता हुए थे, जिन्हें बाद में मृत घोषित कर दिया गया। आपदा पीड़ितों का आरोप है कि अब तक उन्हें उचित मुआवजा नहीं मिल पाया है, इसी को लेकर 26 जनवरी को उन्होंने जिला मुख्यालय पर धरना दिया था, जो डीएम के आश्वासन के बाद स्थगित कर दिया गया।







