रुद्रप्रयाग: केदारनाथ नेशनल हाईवे के तिलवाड़ा क्षेत्र में चल रही अवैध पहाड़ कटाई अब केवल एक निर्माण कार्य का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह पर्यावरणीय अपराध, नियमों की खुलेआम अवहेलना और प्रशासनिक उदासीनता का गंभीर उदाहरण बनती जा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि एक तथाकथित ठेकेदार द्वारा हाईवे किनारे निर्धारित मानकों को पूरी तरह दरकिनार करते हुए अंधाधुंध पहाड़ काटा गया और यह सब एनएच विभाग व जिला प्रशासन की जानकारी में होने के बावजूद लंबे समय तक जारी रहा।
सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि विभागीय नोटिस और जुर्माना लगाए जाने के बाद भी कटिंग का कार्य नहीं रुका। इससे लोगों में यह धारणा और मजबूत हो रही है कि कार्रवाई केवल कागजी औपचारिकता बनकर रह गई, जबकि जमीनी स्तर पर नियमों को रौंदा जाता रहा। न तो हाईवे से तय सुरक्षित दूरी का पालन किया गया और न ही पर्यावरणीय बफर जोन के मानकों की कोई परवाह की गई। भारी मशीनों की दिन-रात आवाजाही और खुदाई से न केवल सड़क की संरचना कमजोर हो रही है, बल्कि आसपास के रिहायशी इलाकों पर भी खतरा बढ़ता जा रहा है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि पहाड़ कटाई के कारण उड़ती धूल और मलबे से सड़क पर दृश्यता प्रभावित हो रही है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका कई गुना बढ़ गई है। साथ ही भूस्खलन का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है। हिमालय जैसे अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह की लापरवाही को लोग सीधे तौर पर जनजीवन से खिलवाड़ मान रहे हैं। दिसंबर 2025 में तिलवाड़ा और अगस्त्यमुनि बाजार में अतिक्रमण हटाने के दौरान प्रशासन की सख्ती देखने को मिली थी, लेकिन हाईवे किनारे हो रही इस अवैध पहाड़ कटाई पर वही प्रशासनिक चुप्पी अब सवालों के घेरे में है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जहां अन्य क्षेत्रों में 24 मीटर तक की कटिंग का मानक लागू है, वहीं तिलवाड़ा क्षेत्र में करीब 14 मीटर अतिरिक्त कटाई कर दी गई। एनएच विभाग के अधिशासी अभियंता ओंकार पांडे द्वारा ठेकेदार की एनओसी निरस्त किए जाने और 2 लाख 5 हजार 178 रुपये का जुर्माना लगाए जाने की जानकारी दी गई है, लेकिन लोगों का सवाल है कि क्या हिमालय जैसे संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्र को नुकसान पहुंचाने की कीमत महज कुछ लाख रुपये ही है। साथ ही यह भी सवाल उठ रहा है कि जब नोटिस जारी हो चुका था, तो कटिंग को तत्काल प्रभाव से क्यों नहीं रोका गया।
भरदार विकास मंच से जुड़े भगत चौहान ने आरोप लगाया है कि ठेकेदार ने अवैध कटिंग के नाम पर स्थानीय लोगों से मोटी रकम वसूली और सभी नियमों की खुलेआम अनदेखी की। उनका कहना है कि एनएच विभाग, तहसील और जिला प्रशासन की चुप्पी ने ठेकेदार के हौसले और बुलंद कर दिए।
अब यह मामला केवल पहाड़ कटाई तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सवाल खड़ा कर रहा है कि आखिर यह सब किसके संरक्षण में हुआ। यदि नोटिस और जुर्माने केवल औपचारिकता बनकर रहेंगे, तो ऐसे मामलों में नियमों का कोई अर्थ नहीं रह जाएगा। स्थानीय लोगों की मांग है कि समय रहते जिम्मेदार अधिकारियों और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, अन्यथा यह लापरवाही भविष्य में किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।







