हरिद्वार: यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (यूजीसी) से जुड़े प्रस्तावित कानून के विरोध में सवर्ण समाज का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है. आगामी 8 मार्च को सवर्ण समाज समन्वय समिति के आह्वान पर यूजीसी रोल बैक महाआंदोलन आयोजित किया जाएगा. इसको लेकर हरिद्वार से श्री अखंड परशुराम अखाड़े और काली सेना से जुड़े पदाधिकारियों ने बड़ी संख्या में दिल्ली कूच करने की अपील की है. काली सेना प्रमुख और शांभवी धाम आश्रम के परमाध्यक्ष स्वामी आनंद स्वरूप ने यूजीसी को काला कानून करार देते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है.
उत्तरी हरिद्वार स्थित शांभवी धाम आश्रम में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान अखंड परशुराम अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक और काली सेना प्रमुख स्वामी आनंद स्वरूप ने सवर्ण समाज से आह्वान किया कि वे 8 मार्च को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाले महाआंदोलन में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचें. पंडित अधीर कौशिक ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि यूजीसी जैसा कानून थोपकर सरकार सनातन धर्म और सवर्ण समाज के हितों के खिलाफ कार्य कर रही है. उन्होंने कहा कि जब सनातन समाज एकजुट हो रहा है, तब सरकार समुदाय को बांटने का प्रयास कर रही है.
पंडित अधीर कौशिक ने दावा किया कि 8 मार्च को हजारों नागा साधु दिल्ली की सड़कों पर उतरकर सरकार की नीतियों का विरोध करेंगे. उन्होंने कहा कि यूजीसी एक्ट कुछ विशेष वर्गों को लाभ पहुंचाने वाला और सवर्ण समाज के अधिकारों के खिलाफ है, इसलिए इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए. उन्होंने भाजपा सरकार पर वोट बैंक की राजनीति करने और हिंदू समाज को जातियों में बांटने का आरोप भी लगाया. साथ ही स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी जाति के खिलाफ नहीं, बल्कि सरकार की विभाजनकारी नीतियों के खिलाफ है.
वहीं काली सेना प्रमुख स्वामी आनंद स्वरूप ने कहा कि जब तक सरकार यूजीसी कानून को वापस नहीं लेती, तब तक देशभर में आंदोलन जारी रहेगा. उन्होंने दावा किया कि जनता अब सरकार की नीतियों को समझ चुकी है और आने वाले चुनावों में इसका जवाब देगी.
रुद्रपुर में भी सौंपा गया ज्ञापन
यूजीसी कानून के विरोध में उधम सिंह नगर के रुद्रपुर में भी समस्त सवर्ण समाज एकजुट नजर आया. सवर्ण समाज के प्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नाम ज्ञापन सौंपकर प्रस्तावित यूजीसी कानून के खिलाफ गहरा विरोध दर्ज कराया. ज्ञापन में इस कानून को समानता के सिद्धांतों के विपरीत बताते हुए सवर्ण समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए घातक करार दिया गया.
रुद्रपुर मुख्यालय में प्रदर्शन कर रहे सवर्ण समाज के लोगों ने आरोप लगाया कि यूजीसी कानून को बिना व्यापक विमर्श के एकतरफा तरीके से लागू करने की कोशिश की जा रही है. उनका कहना है कि यह कानून शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक संतुलन को प्रभावित करेगा. समाज के नेताओं ने सरकार से यूजीसी कानून को तत्काल वापस लेने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और अधिक व्यापक और उग्र किया जाएगा.







