सीमांत खटीमा के चकरपुर स्थित घने जंगलों से लगे प्राचीन वनखंडी महादेव मंदिर में शिवरात्रि से शुरू होने वाले दस दिवसीय मेले की तैयारियां युद्धस्तर पर चल रही हैं। खटीमा क्षेत्र के सबसे विशाल और सबसे लंबे समय तक चलने वाले इस मेले में हर वर्ष लाखों श्रद्धालु जलाभिषेक कर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
मेले को लेकर उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों से दुकानदारों का पहुंचना शुरू हो गया है। मेला परिसर में सैकड़ों दुकानें सजने लगी हैं। श्रद्धालुओं और दर्शकों के मनोरंजन के लिए मौत का कुआं, बड़े-बड़े झूले, सर्कस और अन्य आकर्षण भी लगाए जा रहे हैं। 15 फरवरी को शिवरात्रि से शुरू होकर यह मेला अगले दस दिनों तक चलेगा, जिसमें व्यापारी पूरे मेले की अवधि तक डेरा जमाए रहेंगे।
शिवलिंग के सात रंग बदलने की मान्यता
पांडवकालीन माने जाने वाले वनखंडी महादेव मंदिर को लेकर धार्मिक मान्यता है कि शिवरात्रि के दिन यहां स्थापित शिवलिंग सात रंग बदलता है। इसी आस्था के चलते शिवरात्रि पर जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने के लिए देश ही नहीं बल्कि नेपाल से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। कुमाऊं के इतिहास में भी इस प्राचीन मंदिर का उल्लेख मिलता है, जिससे इसकी धार्मिक महत्ता और बढ़ जाती है।
मुख्यमंत्री भी करते हैं शुभारंभ
हर वर्ष प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी मेले के शुभारंभ अवसर पर यहां पहुंचकर वनखंडी महादेव के दर्शन करते हैं। मंदिर समिति द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधाओं, सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है, ताकि मेले के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो।
आस्था, परंपरा और उत्सव का संगम बना यह शिवरात्रि मेला खटीमा की पहचान है। लाखों श्रद्धालु भोलेनाथ के दर पर हाजिरी लगाने के साथ-साथ मेले का आनंद लेने के लिए उत्साहित हैं।







