उत्तराखंड की शांत वादियों वाली राजधानी देहरादून इन दिनों गोलियों की गूंज और सिलसिलेवार हत्याओं से दहल उठी है। पिछले 16 दिनों के भीतर शहर में 5 बड़ी हत्याएं हो चुकी हैं, जिसने पुलिस प्रशासन और प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बिगड़ते हालातों के विरोध में आज 13 फरवरी, शुक्रवार को NSUI (National Student Union of India) के कार्यकर्ताओं ने देहरादून स्थित पुलिस मुख्यालय का घेराव किया।
पुलिस मुख्यालय पर भारी हंगामा और धक्का-मुक्की
शुक्रवार सुबह राजपुर रोड जैसे व्यस्त और पॉश इलाके में हुए ताजा गोलीकांड के बाद विपक्ष और छात्र संगठनों का गुस्सा फूट पड़ा। NSUI और यूथ कांग्रेस के दर्जनों कार्यकर्ता सुबह पुलिस मुख्यालय पहुंचे और सरकार व पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
प्रदर्शन के दौरान स्थिति तब तनावपूर्ण हो गई जब प्रदर्शनकारियों ने मुख्यालय के भीतर घुसने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस और छात्रों के बीच तीखी झड़प और भारी धक्का-मुक्की देखने को मिली। पुलिस ने प्रदर्शन को उग्र होता देख बल प्रयोग किया और कई कार्यकर्ताओं को जबरन हिरासत में लेकर गाड़ियों में भरकर धरना स्थल से हटा दिया।
“यूपी की तरह बनता जा रहा है उत्तराखंड” – छात्र नेता
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे छात्र नेताओं ने प्रदेश की सुरक्षा स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की:
- हिमांशु (NSUI कार्यकर्ता): “देहरादून में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। शहर के पॉश इलाकों में दिनदहाड़े गोलियां चल रही हैं। हम अपनी आवाज उठाने आए थे, लेकिन पुलिस ने हमारे लोकतांत्रिक प्रदर्शन को कुचलने का प्रयास किया।”
- अनुराग कर्णवाल: “पहले ऐसी खबरें सिर्फ उत्तर प्रदेश से आती थीं, लेकिन अब देहरादून भी ‘क्राइम सिटी’ बनता जा रहा है। घंटाघर, पलटन बाजार और परेड ग्राउंड जैसे सुरक्षित माने जाने वाले इलाकों में लड़कियों के गले काटे जा रहे हैं और व्यापारियों को निशाना बनाया जा रहा है।”
- मयंक रावत: “बाहरी अपराधी यहां आकर माहौल खराब कर रहे हैं और पुलिस सोई हुई है। पुलिस को नींद से जगाने के लिए हम शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन हमारे साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया।”
खौफ के साये में राजधानी
बता दें कि हालिया घटनाओं में पल्टन बाजार, परेड ग्राउंड और राजपुर रोड जैसे इलाके शामिल हैं, जो शहर के सबसे व्यस्त केंद्र माने जाते हैं। विपक्ष का आरोप है कि जब पुलिस मुख्यालय के चंद कदमों की दूरी पर अपराधी बेखौफ होकर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं, तो आम नागरिक खुद को सुरक्षित कैसे महसूस कर सकता है।







