रुद्रपुर: उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले में अवैध हथियारों की सप्लाई के खुलासे के बाद राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्म हो गया है। उत्तर प्रदेश के बरेली जनपद की बहेड़ी थाना पुलिस द्वारा अंतरराज्यीय हथियार तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ किए जाने के बाद इस मामले की गूंज किच्छा से लेकर रुद्रपुर तक सुनाई दे रही है। भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के पूर्व जिलाध्यक्ष का नाम सामने आने के बाद राजनीतिक दल आमने-सामने आ गए हैं।
क्या है पूरा मामला?
बरेली के थाना बहेड़ी पुलिस के अनुसार 19 फरवरी को चेकिंग के दौरान अवैध हथियारों की सप्लाई करने वाले गिरोह के दो सदस्यों—तसलीम अहमद (29) और सोमू खान (36)—को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने उनके कब्जे से 5 अवैध पिस्टल, 36 जिंदा कारतूस, 2 तमंचे और कारतूस बरामद किए। पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि ये हथियार उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले के किच्छा थाना क्षेत्र स्थित ग्राम दरऊ के प्रधानपति अब्दुल गफ्फार खान और समीर को सप्लाई किए जाने थे।
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपी कुख्यात हिस्ट्रीशीटर इशरत अली के सहयोगी हैं। बरामद कार भी इशरत अली की बताई जा रही है। आरोप है कि इशरत अली ने ही इन दोनों को हथियार देकर किच्छा भेजा था।
बरेली दंगों से भी जुड़ाव के संकेत
बरेली पुलिस ने यह भी दावा किया है कि इशरत अली, फराहत अली का सगा भाई है, जिसे बरेली दंगों के दौरान मौलाना तौकीर रजा के साथ गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ में सोमू खान ने स्वीकार किया कि 26 सितंबर 2025 को उसने फराहत अली और इशरत अली के कहने पर भारी मात्रा में पिस्टल, तमंचे और कारतूस झुमका तिराहा, बरेली में एक व्यक्ति को सौंपे थे। पुलिस का कहना है कि दंगों के दौरान भीड़ द्वारा पुलिस पर की गई फायरिंग में इस्तेमाल असलहे अवैध थे और उनकी सप्लाई इसी नेटवर्क के जरिए की गई थी।
राजनीति में घमासान
अब्दुल गफ्फार खान भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के पूर्व जिलाध्यक्ष रह चुके हैं। नाम सामने आने के बाद किच्छा विधायक तिलक राज बेहड़ ने प्रेस वार्ता कर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि इन हथियारों को किच्छा क्षेत्र में हिंसा भड़काने और हत्या जैसी घटनाओं को अंजाम देने की नीयत से मंगाया जा रहा था। उन्होंने उधम सिंह नगर पुलिस से निष्पक्ष और व्यापक जांच की मांग की है।
वहीं, पूर्व भाजपा विधायक राजेश शुक्ला ने इन आरोपों को निराधार और राजनीतिक साजिश करार दिया है। उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि गफ्फार खान दोषी पाए जाते हैं तो सख्त कार्रवाई हो, लेकिन यदि वे निर्दोष साबित होते हैं तो आरोप लगाने वालों को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।
जांच पर टिकी निगाहें
फिलहाल यह मामला केवल आपराधिक जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि राजनीतिक रूप ले चुका है। उधम सिंह नगर की सियासत में इसे लेकर हलचल तेज है। आम जनता की निगाहें अब पुलिस जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई पर टिकी हैं। जांच के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि हथियारों की सप्लाई के पीछे असली मकसद क्या था और इस पूरे नेटवर्क में किन-किन लोगों की भूमिका रही।







