रुद्रप्रयाग: केदारघाटी स्थित पौराणिक त्रियुगीनारायण मंदिर ने इस वर्ष शीतकालीन यात्रा के दौरान आस्था का नया इतिहास रच दिया है। 24 अक्तूबर से 21 फरवरी तक चले शीतकालीन दर्शन काल में कुल 47,868 श्रद्धालुओं ने मंदिर पहुंचकर विधिवत पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक और जलाभिषेक कर विश्व शांति, पारिवारिक सुख-समृद्धि और मंगलकामनाएं कीं। मंदिर प्रबंधन के अनुसार यह संख्या बीते वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय रूप से अधिक है।
बीते वर्ष से लगभग 7 हजार अधिक श्रद्धालु
पिछले वर्ष शीतकालीन यात्रा के दौरान दर्शनार्थियों की संख्या लगभग 40 हजार के आसपास रही थी, जबकि इस बार यह आंकड़ा 47 हजार के पार पहुंच गया। करीब 7 हजार श्रद्धालुओं की वृद्धि यह दर्शाती है कि शीतकाल में भी धार्मिक पर्यटन का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
शिव-पार्वती विवाह स्थल के रूप में आस्था का केंद्र
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी पवित्र स्थल पर भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था। मंदिर परिसर में स्थित अखंड अग्निकुंड को उसी दिव्य विवाह का साक्षी माना जाता है, जो युगों से निरंतर प्रज्वलित है। श्रद्धालु इस पवित्र अग्नि को साक्षी मानकर वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में बढ़ी पहचान
देशभर में “वेडिंग डेस्टिनेशन” के रूप में प्रसिद्ध इस मंदिर में वर्षभर विवाह समारोह आयोजित होते हैं। विशेषकर शुभ मुहूर्तों में यहां नवयुगलों की लंबी बुकिंग सूची देखी जा रही है। इस वर्ष महाशिवरात्रि पर्व पर भी रिकॉर्ड संख्या में विवाह संपन्न हुए, जिससे मंदिर की राष्ट्रीय पहचान और मजबूत हुई है।
बर्फीली ठंड में भी श्रद्धालुओं की आवाजाही
जहां अधिकांश पर्वतीय क्षेत्रों में शीतकाल के दौरान तीर्थाटन की रफ्तार धीमी पड़ जाती है, वहीं त्रियुगीनारायण में श्रद्धालुओं की निरंतर आवाजाही ने नया उदाहरण पेश किया है। कड़ाके की ठंड के बावजूद देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने दर्शन कर आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिला बल
मंदिर प्रबंधक अजय शर्मा के अनुसार बेहतर सड़क संपर्क, ऑनलाइन सूचना प्रणाली और वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में बढ़ती लोकप्रियता ने इस वृद्धि में अहम भूमिका निभाई है। श्रद्धालुओं और विवाह समारोहों की बढ़ती संख्या से स्थानीय व्यापार, होटल उद्योग, पंडिताई व्यवस्था और परिवहन क्षेत्र को सीधा लाभ मिला है। शीतकाल में भी बाजारों में रौनक बनी रही, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।
शीतकालीन यात्रा में दर्ज यह ऐतिहासिक वृद्धि न केवल आस्था की मजबूती को दर्शाती है, बल्कि यह संकेत भी देती है कि उत्तराखंड में वर्षभर धार्मिक पर्यटन की संभावनाएं लगातार विस्तार पा रही हैं।







