भराड़ीसैंण (गैरसैंण): भौगोलिक दृष्टि से Gairsain उत्तराखंड का मध्य स्थल माना जाता है। यही कारण है कि उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान भी गैरसैंण आंदोलन की धुरी बना रहा। ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित होने के बाद अब परिस्थितियां बदलती दिखाई दे रही हैं और “गैरसैंण गैर किल्लै” जैसे तंज से आगे बढ़कर यह क्षेत्र अब “संभावनाओं का गैरसैंण” बनता नजर आ रहा है।
8 हजार करोड़ के विकास कार्यों से बढ़ी उम्मीदें
ग्रीष्मकालीन राजधानी बनने के बाद से गैरसैंण क्षेत्र में अब तक करीब 8 हजार करोड़ रुपये के ढांचागत विकास कार्य किए जा चुके हैं। इन कार्यों के साथ ही स्थानीय लोगों और पूरे उत्तराखंड के आम जनमानस की उम्मीदें भी लगातार मजबूत हुई हैं।
यदि वर्ष 2013 की बात करें तो उस समय Vijay Bahuguna के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के दौरान वरिष्ठ नेता Satpal Maharaj के प्रयासों से भराड़ीसैंण में विधानसभा भवन के लिए भूमि पूजन किया गया था। इस कदम ने गैरसैंण में विधानसभा निर्माण की दिशा में पहली मजबूत नींव रखी।
इसके बाद वर्ष 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री Harish Rawat की सरकार ने भराड़ीसैंण की करीब 47 एकड़ भूमि पर विधानसभा परिसर के निर्माण का कार्य शुरू कराया। इस पहल ने पहाड़ी क्षेत्रों और राज्य आंदोलनकारियों की भावनाओं को नई ऊर्जा देने का काम किया।
आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित हुआ विधानसभा परिसर
समय के साथ गैरसैंण के भराड़ीसैंण में विधानसभा का मुख्य भवन तैयार किया गया। इसके साथ ही मंत्रियों, विधायकों, अधिकारियों और कर्मचारियों के आवास भी बनाए जा चुके हैं। यहां हेलीपैड, डबल लेन सड़क, पेयजल, बिजली और पार्किंग जैसी सुविधाओं का भी विकास किया गया है।
वर्तमान में महिला कर्मचारी हॉस्टल और मीडिया आवास का निर्माण कार्य भी प्रगति पर है। इन सभी निर्माण कार्यों ने गैरसैंण को प्रशासनिक दृष्टि से मजबूत आधार देने का काम किया है।
त्रिवेंद्र रावत की घोषणा से खुले नए रास्ते
वर्ष 2020 में तत्कालीन मुख्यमंत्री Trivendra Singh Rawat ने एक बड़ा फैसला लेते हुए भराड़ीसैंण (गैरसैंण) को उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित कर दिया था। उनकी इस घोषणा ने गैरसैंण के विकास और संभावनाओं के नए द्वार खोल दिए।
स्थायी राजधानी को लेकर अभी भी इंतजार
हालांकि वर्तमान में Pushkar Singh Dhami सरकार के कार्यकाल में विधानसभा परिसर से जुड़े कुछ आवश्यक कार्यों को आगे बढ़ाया गया है और आसपास के गांवों के विकास के प्रयास भी किए गए हैं। लेकिन पिछले पांच वर्षों में स्थायी राजधानी को लेकर कोई बड़ा निर्णय नहीं होने से लोगों में मायूसी भी देखने को मिल रही है।
नगर पंचायत अध्यक्ष Mohan Bhandari का कहना है कि भराड़ीसैंण में अब तक सचिवालय निर्माण की स्वीकृति नहीं मिलने से आमजन इसे ग्रीष्मकालीन राजधानी की उपेक्षा के रूप में देख रहे हैं।
बजट सत्र से फिर जगी उम्मीद
राज्य आंदोलनकारी Suresh Kumar Bisht और Harendra Kandari का कहना है कि पहाड़ी जिलों में रहने वाले लोग लंबे समय से गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाए जाने की मांग कर रहे हैं। उनके अनुसार पिछले पांच वर्षों से लोग इस फैसले का इंतजार कर रहे हैं।
ऐसे में चुनावी वर्ष के माहौल में 9 मार्च से 13 मार्च तक भराड़ीसैंण में आयोजित होने जा रहे बजट सत्र से एक बार फिर उम्मीद जगी है कि इस मुद्दे पर कोई ठोस और निर्णायक फैसला सामने आ सकता है।







