देहरादून/गैरसैंण: उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र का दूसरा दिन आज भराड़ीसैंण (गैरसैंण) में आयोजित हुआ। सत्र के दूसरे दिन सरकार की ओर से 11 महत्वपूर्ण विधेयक सदन के पटल पर रखे गए, जिनमें देवभूमि परिवार विधेयक 2026 को सबसे अहम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि इस विधेयक के लागू होने से राज्य के नागरिकों तक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी और पारदर्शी तरीके से पहुंच सकेगा।
प्रदेश सरकार ने कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और लाभार्थियों तक सहायता पारदर्शी तरीके से पहुंचाने के उद्देश्य से देवभूमि परिवार विधेयक 2026 को सदन में प्रस्तुत किया है। इस विधेयक के कानून बनने के बाद उत्तराखंड में एक एकीकृत और सत्यापित परिवार-आधारित डेटाबेस ‘देवभूमि परिवार’ की स्थापना की जाएगी। इसका उद्देश्य विभिन्न विभागों में बिखरे हुए लाभार्थी डेटा को एक ही मंच पर लाकर योजनाओं के संचालन को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और समन्वित बनाना है।
इस नई व्यवस्था के तहत देवभूमि परिवार आईडी बनाई जाएगी, जिसमें परिवार के मुखिया के रूप में 18 वर्ष से अधिक आयु की वरिष्ठतम महिला सदस्य का नाम दर्ज किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे योजनाओं के लाभ का सही और पारदर्शी वितरण सुनिश्चित किया जा सकेगा।
वर्तमान समय में राज्य के विभिन्न विभाग अपनी-अपनी योजनाओं के लिए अलग-अलग लाभार्थी डेटाबेस का उपयोग करते हैं। इसके कारण कई बार आंकड़ों का दोहराव, पुनः सत्यापन की जटिल प्रक्रियाएं और विभागों के बीच समन्वय की कमी जैसी समस्याएं सामने आती हैं। इससे प्रशासनिक संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में भी बाधाएं उत्पन्न होती हैं।
सरकार के अनुसार इस विधेयक के लागू होने के बाद राज्य में एक एकीकृत परिवार-स्तरीय डेटा भंडार स्थापित किया जाएगा, जो विभिन्न विभागों और एजेंसियों के लिए लाभार्थी संबंधी सूचनाओं का विश्वसनीय स्रोत (Single Source of Truth) होगा। इससे योजनाओं का बेहतर लक्षित क्रियान्वयन संभव हो सकेगा और जरूरतमंद परिवारों तक सरकारी सहायता अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेगी।
इसके अलावा इस डेटा प्रणाली के प्रबंधन, संरक्षण और संरचनात्मक सुधारों के लिए एक संस्थागत तंत्र भी विकसित किया जाएगा। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत विभागों के बीच सुरक्षित और विनियमित डेटा आदान-प्रदान की व्यवस्था भी बनाई जाएगी, जिससे योजनाओं के बेहतर वितरण और समन्वय को मजबूती मिलेगी।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी व्यवस्था डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम 2023 (DPDP Act 2023) के प्रावधानों के अनुरूप संचालित की जाएगी, ताकि नागरिकों के डेटा का उपयोग उनकी सहमति, पारदर्शिता और सुरक्षा के साथ सुनिश्चित किया जा सके।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि देवभूमि परिवार विधेयक 2026 सुशासन की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। इससे प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी, संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और उत्तराखंड के नागरिकों तक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेगा।
सदन में पेश किए गए 11 विधेयक इस प्रकार हैं:
- उत्तराखंड दुकान और स्थापन (रोजगार विनियमन और सेवा-शर्त) (संशोधन) विधेयक, 2026
- उत्तराखंड जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक, 2026
- उत्तराखंड माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2026
- समान नागरिक संहिता, उत्तराखंड (संशोधन) विधेयक, 2026
- उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश लोक सेवा – शारीरिक रूप से विकलांग, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रित और पूर्व सैनिकों के लिए आरक्षण अधिनियम 1993) (संशोधन) विधेयक, 2026
- उत्तराखंड कारागार और सुधारात्मक सेवाएं (संशोधन) विधेयक, 2026
- उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग (संशोधन) विधेयक, 2026
- उत्तराखंड भाषा संस्थान (संशोधन) विधेयक, 2026
- उत्तराखंड देवभूमि परिवार विधेयक, 2026
- उत्तराखंड निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026
- उत्तराखंड सार्वजनिक द्यूत रोकथाम विधेयक, 2026
सरकार का कहना है कि इन विधेयकों के माध्यम से राज्य में प्रशासनिक सुधार, पारदर्शिता और योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन को मजबूती मिलेगी।







