गैरसैंण: उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण स्थित भराड़ीसैंण विधानसभा परिसर में चल रहे बजट सत्र के दूसरे दिन सदन में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। प्रश्नकाल के दौरान वन मंत्री सुबोध उनियाल ने राज्य में वनाग्नि की घटनाओं को रोकने के लिए सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी।
वन मंत्री ने बताया कि चीड़ के जंगलों में आग लगने के प्रमुख कारणों में से एक जमीन पर गिरने वाली पिरूल (चीड़ की सूखी पत्तियां) है। इस समस्या से निपटने के लिए सरकार ने ग्रामीणों से बड़े पैमाने पर पिरूल खरीदने की योजना शुरू की है। वर्ष 2025 में ग्रामीणों से 5,532 टन पिरूल खरीदा गया है और अब इस लक्ष्य को बढ़ाकर 8,555 टन कर दिया गया है। सरकार की मंशा है कि पिरूल को एकत्रित कर जंगलों में आग लगने की आशंका को न्यूनतम स्तर तक कम किया जा सके।
वन मंत्री सुबोध उनियाल ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर वनाग्नि को रोकने के लिए गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में वन विभाग के माध्यम से पिछले एक वर्ष के दौरान ग्रामीणों से लगभग 5 करोड़ 42 लाख रुपये का पिरूल खरीदा गया है। इसके साथ ही लोगों को जागरूक करने के लिए व्यापक अभियान भी चलाया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि वनाग्नि की घटनाओं को रोकने के लिए प्रदेशभर में 1,239 जागरूकता शिविर आयोजित किए गए हैं। इसके अलावा मुख्यमंत्री के निर्देश पर ग्राम प्रधानों की अध्यक्षता में फॉरेस्ट फायर मैनेजमेंट कमेटी का गठन किया गया है। ये समितियां वन विभाग के साथ मिलकर जंगलों को आग से बचाने के लिए काम कर रही हैं। इस कार्य के लिए संबंधित ग्राम पंचायतों को 30 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है।
वन मंत्री ने बताया कि जंगलों में आग बुझाने में फायर वाचर्स की अहम भूमिका होती है। उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने पहली बार उनके लिए बीमा सुरक्षा कवच उपलब्ध कराया है। इसके तहत फायर वाचर्स का 10 लाख रुपये का सामूहिक बीमा किया गया है। पिछले वर्ष करीब 5,600 फायर वाचर्स ने वनाग्नि रोकने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था।
वहीं, राज्य सरकार ने पूर्व उपनल कर्मियों के हितों को ध्यान में रखते हुए भी एक अहम फैसला लिया है। वर्ष 2026-27 के बजट में पूर्व उपनल कर्मियों को समान कार्य के लिए समान वेतन उपलब्ध कराने की दिशा में कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसके लिए बजट में 289 करोड़ 98 लाख 29 हजार रुपये का प्रावधान किया है।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार कर्मचारियों और श्रमिकों के हितों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है। पूर्व उपनल कर्मियों ने विभिन्न विभागों में लंबे समय तक महत्वपूर्ण सेवाएं दी हैं और उनके हितों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है। इसी सोच के तहत समान कार्य के लिए समान वेतन की व्यवस्था लागू करने के लिए बजट में पर्याप्त धनराशि सुनिश्चित की गई है।







