देहरादून: राजधानी के राजकीय दून मेडिकल कॉलेज में रैगिंग की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। कॉलेज प्रबंधन ने जीरो टॉलरेंस नीति अपनाते हुए पीजी हॉस्टल की व्यवस्था में बड़े बदलाव शुरू कर दिए हैं।
28 कमरे नए सिरे से आवंटित, अलग होंगे जूनियर-सीनियर
नई व्यवस्था के तहत हॉस्टल के 28 कमरों को पुनर्व्यवस्थित किया जाएगा। जूनियर और सीनियर छात्रों को अलग-अलग फ्लोर/ब्लॉकों में रखा जाएगा, ताकि अनावश्यक संपर्क कम हो और रैगिंग पर प्रभावी रोक लग सके।
निगरानी कड़ी: CCTV और वार्डन सिस्टम मजबूत
हॉस्टल में सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाई जा रही है और वार्डन की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही एक मजबूत शिकायत तंत्र विकसित किया जा रहा है, जिससे छात्र बिना डर के अपनी बात रख सकें।
कॉलेज की प्राचार्य डॉ. गीता जैन ने स्पष्ट किया कि छात्रों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और खासतौर पर प्रथम वर्ष के छात्रों को सुरक्षित व सकारात्मक माहौल देने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।
रैगिंग पर ‘जीरो टॉलरेंस’, सख्त सजा का प्रावधान
प्रबंधन ने चेतावनी दी है कि रैगिंग में शामिल पाए जाने वाले छात्रों के खिलाफ निलंबन, हॉस्टल से निष्कासन और अकादमिक दंड जैसी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इस मामले पर स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत ने भी सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि रैगिंग रोकने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे और दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
क्या था मामला?
हाल ही में 2025 बैच के छात्रों ने 2023 बैच के एक सीनियर पर धमकाने और प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। इसकी शिकायत राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग तक पहुंची, जिसके बाद जांच शुरू हुई।
जांच में कुछ छात्रों की संलिप्तता सामने आने पर एमबीबीएस के 9 छात्रों को 3 महीने के लिए अकादमिक गतिविधियों से निष्कासित किया गया। इनमें से 2 छात्रों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाने के साथ उन्हें हॉस्टल से स्थायी रूप से बाहर कर दिया गया।
पहले भी सामने आ चुके हैं मामले
बीते वर्षों में देहरादून, हल्द्वानी और श्रीनगर समेत कई मेडिकल कॉलेजों में रैगिंग के मामले सामने आ चुके हैं, जिसके बाद सरकार लगातार सख्ती बढ़ा रही है।
सुरक्षित माहौल की उम्मीद
प्रशासन का मानना है कि नई हॉस्टल व्यवस्था, सख्त निगरानी और कड़े नियमों से रैगिंग जैसी घटनाओं पर लगाम लगेगी और छात्रों को सुरक्षित, अनुशासित व सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण मिल सकेगा।







