उत्तरकाशी जनपद में स्थित प्रसिद्ध गौमुख ट्रैक पर अभी भी बर्फबारी का असर बना हुआ है। ट्रैक के निरीक्षण के लिए गई गंगोत्री नेशनल पार्क के अधिकारियों और गढ़वाल हिमालय ट्रैकिंग एंड माउंटेनियरिंग एसोसिएशन की टीम को भोजगढ़ी नाले तक पहुंचने के बाद वापस लौटना पड़ा। यहां अत्यधिक बर्फ जमा होने के कारण आगे बढ़ना संभव नहीं हो पाया।
गंगोत्री नेशनल पार्क के गेट भले ही 1 अप्रैल से खोल दिए गए हों, लेकिन गौमुख ट्रैक पर अधिक बर्फबारी और क्षतिग्रस्त मार्ग के चलते अब तक यात्रियों और ट्रैकर्स की आवाजाही पर रोक बनी हुई है। निरीक्षण के लिए पार्क के उपनिदेशक हरीश नेगी और एसोसिएशन के अध्यक्ष जयेंद्र राणा के नेतृत्व में टीम ने कनखू बैरियर से भोजगढ़ी तक करीब 11 किलोमीटर पैदल ट्रैक का जायजा लिया। हालांकि भोजगढ़ी नाले में भारी बर्फ और दोबारा बर्फबारी शुरू होने के कारण टीम को बीच रास्ते से ही लौटना पड़ा।
एसोसिएशन के अध्यक्ष जयेंद्र राणा ने बताया कि निरीक्षण के दौरान पर्वतारोहियों के लिए मार्ग अपेक्षाकृत सुरक्षित पाया गया है, इसलिए उन्हें सीमित अनुमति दी जा सकती है। वहीं पार्क उपनिदेशक हरीश नेगी ने कहा कि यदि इस सप्ताह ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी नहीं होती है, तो एक सप्ताह के भीतर पर्वतारोहियों के लिए ट्रैक खोला जा सकता है। हालांकि आम यात्रियों को अभी गौमुख जाने के लिए इंतजार करना होगा, क्योंकि ट्रैक की स्थिति फिलहाल सुरक्षित नहीं है।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि ट्रैक मार्ग पर स्थित आश्रम और जीएमवीएन के गेस्ट हाउस भी अभी बंद हैं, जिससे आम यात्रियों के लिए यात्रा और अधिक कठिन हो जाती है।
गौरतलब है कि गंगोत्री से गौमुख तक कुल ट्रैकिंग दूरी लगभग 18 किलोमीटर है, जिसे आमतौर पर दो दिनों में पूरा किया जाता है। पहले दिन गंगोत्री से भोजबासा (लगभग 14 किमी) और दूसरे दिन भोजबासा से गौमुख (लगभग 4 किमी) की दूरी तय की जाती है। यह ट्रैक गंगोत्री नेशनल पार्क के अंतर्गत आता है और भागीरथी नदी के उद्गम स्थल गौमुख तक पहुंचाता है।
हिमालय की प्राकृतिक सुंदरता, भागीरथी शिखरों के मनोरम दृश्य, तपोवन की शांति और आध्यात्मिक माहौल के कारण यह ट्रैक ट्रैकर्स, पर्वतारोहियों और श्रद्धालुओं के बीच बेहद लोकप्रिय है। फिलहाल सभी की नजरें मौसम पर टिकी हैं, ताकि जल्द ही यह ट्रैक फिर से पूरी तरह खुल सके।






