देहरादून: ऋषिकेश स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), दून मेडिकल कॉलेज और राज्य के अन्य अस्पतालों में मरीजों का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। बढ़ती गंभीर बीमारियों और एडवांस उपचार की जरूरत को देखते हुए एम्स ऋषिकेश में उन्नत सुविधाओं की मांग पिछले कुछ वर्षों में काफी तेजी से बढ़ी है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा को पत्र लिखकर एम्स ऋषिकेश में ‘मल्टी ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन सर्जरी विभाग’ की स्थापना का अनुरोध किया है।
एडवांस मेडिकल सेवाओं की बढ़ती मांग
मुख्यमंत्री धामी ने अपने पत्र में बताया कि हाल के वर्षों में एम्स ऋषिकेश में एडवांस चिकित्सा सेवाओं, विशेषकर अंगदान और मल्टी ऑर्गन प्रत्यारोपण सर्जरी की जरूरत काफी बढ़ गई है। प्रदेश ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा और हिमालयी क्षेत्र के अन्य राज्यों से भी गंभीर मरीज बड़ी संख्या में एम्स पहुंचते हैं।
सीएम ने कहा कि उत्तराखंड में अंगदान को लेकर जागरूकता बढ़ने से संभावित अंगदाता मामलों में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिस कारण उन्नत प्रत्यारोपण सुविधाओं की तत्काल जरूरत महसूस की जा रही है।
बाहरी राज्यों पर निर्भरता से बढ़ती समस्या
वर्तमान में प्रदेश में किडनी, लिवर, पैंक्रियाज और हृदय प्रत्यारोपण की सुविधाएं सीमित हैं। ऐसे में गंभीर मरीजों को इलाज के लिए दिल्ली, चंडीगढ़, लखनऊ या दक्षिण भारत के बड़े मेडिकल सेंटरों का रुख करना पड़ता है। इससे न सिर्फ उपचार में देरी होती है, बल्कि मरीजों को भारी आर्थिक बोझ का सामना भी करना पड़ता है।
मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट किया कि एम्स ऋषिकेश में विशेषज्ञ डॉक्टर, आवश्यक बुनियादी ढांचा, और उन्नत तकनीकी संसाधन उपलब्ध हैं। ऐसे में मल्टी ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन सर्जरी विभाग की स्थापना से संस्थान की क्षमता और प्रभावशीलता में कई गुना वृद्धि होगी।
पूरा उत्तर भारत और हिमालयी क्षेत्र होगा लाभान्वित
सीएम धामी ने कहा कि यह विभाग उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर भारत और हिमालयी राज्यों के लिए जीवनरक्षक सुविधा साबित होगा। इस विभाग की स्थापना से हजारों मरीजों को बड़े शहरों की निर्भरता से मुक्ति मिलेगी और समय पर जीवनरक्षक उपचार उपलब्ध हो सकेगा।
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से आग्रह किया कि एम्स ऋषिकेश में मल्टी ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन सर्जरी विभाग की स्थापना हेतु आवश्यक स्वीकृति जल्द प्रदान की जाए और संबंधित अधिकारियों को शीघ्र कार्रवाई के निर्देश दिए जाएं।
यह कदम प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देगा और गंभीर मरीजों को अत्याधुनिक उपचार उनके ही राज्य में उपलब्ध करा सकेगा।







