देहरादून: उत्तराखंड में अन्य राज्यों से आने वाले वाहनों पर लगाए गए ग्रीन सेस से परिवहन विभाग को रोजाना करीब 20 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हो रहा है। विभाग ने 17 जनवरी से हरिद्वार जिले के नारसन बॉर्डर से ग्रीन सेस वसूली की शुरुआत की थी। इसके बाद 15 फरवरी से प्रदेश के सभी 15 बॉर्डर चेक पोस्ट पर यह व्यवस्था लागू कर दी गई।
सभी चेक पोस्ट से कलेक्शन शुरू होने के बाद अब तक विभाग को करीब ढाई करोड़ रुपये का राजस्व मिल चुका है। परिवहन विभाग ने एक वर्ष में 100 करोड़ रुपये तक की वसूली का लक्ष्य तय किया है।
पर्यटकों की संख्या से बढ़ेगी आय
उत्तराखंड में हर साल करीब 6 करोड़ से अधिक पर्यटक पहुंचते हैं। बड़ी संख्या में वाहनों की आवाजाही को देखते हुए विभाग को उम्मीद है कि ग्रीन सेस के जरिए सालाना 100 करोड़ रुपये जुटाना संभव होगा।
हालांकि, कुछ श्रेणियों के वाहनों को ग्रीन सेस से बाहर रखा गया है। इनमें सरकारी वाहन, अग्निशमन सेवा, एंबुलेंस, दोपहिया और तिपहिया वाहन शामिल हैं। इसके अलावा सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों को भी ग्रीन सेस के दायरे से बाहर रखा गया है, ताकि पर्यावरण अनुकूल वाहनों को बढ़ावा मिल सके।
फास्टैग वॉलेट खाली होने पर भेजा जाएगा नोटिस
परिवहन विभाग के सामने एक बड़ी चुनौती यह है कि कई बार अन्य राज्यों से आने वाले वाहनों के फास्टैग वॉलेट में पर्याप्त बैलेंस नहीं होता, जिससे ग्रीन सेस की वसूली नहीं हो पाती।
दरअसल, भारत सरकार की राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा चलाई जा रही वार्षिक फास्टैग पास योजना के तहत वाहन स्वामी 3000 रुपये देकर 200 टोल प्लाजा क्रॉसिंग या एक वर्ष तक टोल-मुक्त यात्रा का लाभ ले रहे हैं। ऐसे में कई वाहन मालिक फास्टैग वॉलेट में अलग से राशि नहीं रखते।
इस समस्या के समाधान के लिए परिवहन विभाग ने निर्णय लिया है कि जिन वाहनों के फास्टैग वॉलेट में बैलेंस नहीं होगा, उन्हें ग्रीन सेस जमा करने के लिए नोटिस भेजा जाएगा।
एएनपीआर कैमरों से हो रही निगरानी
उप परिवहन आयुक्त शैलेश कुमार तिवारी ने बताया कि पहले चरण में हरिद्वार के नारसन बॉर्डर से ग्रीन सेस वसूली शुरू की गई थी। वर्तमान में प्रदेश के 15 बॉर्डर क्षेत्रों में लगे एएनपीआर कैमरों के जरिए ग्रीन सेस लिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि शुरुआती दौर में कुछ तकनीकी खामियां सामने आई थीं, जिन्हें अब दूर कर लिया गया है और वर्तमान में प्रक्रिया सुचारु रूप से चल रही है।
पर्यावरण संरक्षण में होगा उपयोग
उप परिवहन आयुक्त के अनुसार, ग्रीन सेस से प्राप्त धनराशि का उपयोग पर्यावरण संरक्षण, ट्रैफिक प्रबंधन, वनीकरण और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए किया जाएगा।
चारधाम यात्रा के दौरान अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में वाहन उत्तराखंड आते हैं, जिससे ग्रीन सेस का कलेक्शन और बढ़ने की उम्मीद है। भले ही कुछ समय ‘लीन पीरियड’ रहता हो, लेकिन विभाग को भरोसा है कि सालाना 100 करोड़ रुपये का लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा।







