देहरादून: पर्यावरण संरक्षण और राज्य के राजस्व में बढ़ोतरी की दिशा में उत्तराखंड सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब राज्य की सीमाओं में प्रवेश करने वाले बाहरी राज्यों के वाहनों पर ‘ग्रीन सेस’ (Green Cess) वसूला जाएगा। सरकार के मुताबिक, इस फैसले से हर साल लगभग ₹100 से ₹150 करोड़ की अतिरिक्त आमदनी होगी, जिसे राज्य में पर्यावरणीय परियोजनाओं और सड़क ढांचे को सुधारने में लगाया जाएगा।
कितना लगेगा सेस?
नई नीति के तहत, अलग-अलग श्रेणी के वाहनों पर अलग-अलग दर से ग्रीन सेस लगाया जाएगा —
- कार/जीप पर ₹80 प्रति एंट्री
- बस पर ₹300 से ₹500
- ट्रक पर ₹700 तक
यह सेस राज्य की सीमाओं पर स्थित टोल प्लाज़ा और चेकपोस्ट के माध्यम से वसूला जाएगा।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम
उत्तराखंड एक संवेदनशील पर्वतीय राज्य है, जहां हर साल लाखों पर्यटक और तीर्थयात्री आते हैं। भारी वाहन यातायात और प्रदूषण से राज्य की नाजुक पारिस्थितिकी पर दबाव बढ़ता है। ऐसे में यह ग्रीन सेस न केवल सरकार के लिए आय का स्रोत बनेगा, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी मदद करेगा।
सरकार का कहना है कि इस राशि का एक हिस्सा पेड़ारोपण, सड़क किनारे हरियाली, और प्रदूषण नियंत्रण परियोजनाओं में इस्तेमाल किया जाएगा।
पर्यटन पर असर नहीं पड़ेगा
पर्यटन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस ग्रीन सेस से राज्य के पर्यटन पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। “उत्तराखंड आने वाले लोग राज्य की प्राकृतिक सुंदरता के संरक्षण के महत्व को समझते हैं। यह टैक्स बहुत मामूली है और इसका उद्देश्य सिर्फ राज्य की पारिस्थितिकी की रक्षा करना है,” अधिकारी ने कहा।
💬 सरकार का बयान
परिवहन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया,
“ग्रीन सेस से होने वाली आय को पर्यावरणीय प्रोजेक्ट्स और सड़क सुरक्षा के लिए उपयोग किया जाएगा। यह कदम उत्तराखंड को एक क्लीन एंड ग्रीन स्टेट बनाने की दिशा में अहम साबित होगा।”
क्या होगा फायदा?
- हर साल ₹100-150 करोड़ का अतिरिक्त राजस्व
- प्रदूषण नियंत्रण और सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश
- इको-टूरिज्म को बढ़ावा
- बाहरी राज्यों के भारी वाहनों पर नियंत्रण







