देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में बुधवार को सचिवालय में राज्य मंत्रिमंडल की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। यह बैठक उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस के बाद आयोजित पहली कैबिनेट बैठक थी, जिसे खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दरअसल, इस समय उपनल कर्मचारी नियमितीकरण की मांग को लेकर लगातार आंदोलनरत हैं। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि आज की बैठक में उनके नियमितीकरण से जुड़ा कोई ठोस निर्णय या फार्मूला सामने आ सकता है। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक इस प्रक्रिया में आरक्षण नीति से जुड़ी जटिलताएं अब भी बनी हुई हैं।
राज्य स्थापना दिवस के बाद पहली बड़ी बैठक
उत्तराखंड सरकार इस वर्ष राज्य स्थापना दिवस को रजत जयंती वर्ष के रूप में मना रही है। ऐसे में यह कैबिनेट बैठक विशेष महत्व रखती है। सरकार की ओर से हाल ही में कई जनहितकारी घोषणाएं की गई हैं और माना जा रहा है कि इस बैठक में उन सभी को मंजूरी दी जा सकती है।
बैठक पर उपनल कर्मचारियों की विशेष नजर रही। वे लंबे समय से समान कार्य के लिए समान वेतन और स्थायीकरण की मांग कर रहे हैं। इस मुद्दे के समाधान के लिए सरकार ने पहले ही प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री आर.के. सुधांशु की अध्यक्षता में एक समिति गठित की है।
इन प्रस्तावों पर लग सकती है मुहर
बैठक में स्वास्थ्य, शिक्षा, शहरी विकास विभाग, और साइलेज नीति में संशोधन से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे गए हैं।
इसके अलावा, संविदा डॉक्टरों की नियुक्ति में छूट दिए जाने के प्रस्ताव पर भी मुहर लग सकती है।
राज्य में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी को देखते हुए सरकार ने मेडिकल कॉलेजों और सरकारी अस्पतालों में संविदा आधार पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती को अनुमति देने पर विचार किया है, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाया जा सके।
ये प्रस्ताव भी रहे चर्चा में
मंत्रिमंडल बैठक में महिला नीति पर भी चर्चा की संभावना है। महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग द्वारा तैयार यह नीति राज्य में महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।
इसके साथ ही, आयुष्मान कार्ड बनाए जाने की प्रक्रिया को सरल बनाने, तथा शिक्षा विभाग की ट्रांसफर प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन करने से संबंधित प्रस्तावों पर भी मुहर लग सकती है।
स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने के लिए रोगी कल्याण समिति से संबंधित प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। इसके तहत राज्य के ब्लॉक स्तर पर समितियों का गठन किया जाएगा, जिससे स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और सुधार सुनिश्चित किया जा सके।







