रुद्रप्रयाग जिले के जखोली स्थित ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व वाले बधाणीताल के सौन्दर्यीकरण एवं विकास कार्यों की शुरुआत हो गई है. राज्य सेक्टर के अंतर्गत पर्यटन विकास के लिए अवस्थापना निर्माण योजना के तहत बधाणीताल में 3 करोड़ 36 लाख रुपये की लागत से विकास कार्य कराए जाएंगे. मंगलवार को आयोजित कार्यक्रम में इन कार्यों का विधिवत शिलान्यास किया गया.
शिलान्यास कार्यक्रम में जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग प्रतीक जैन, विधायक रुद्रप्रयाग भरत चौधरी एवं जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम कठैत ने संयुक्त रूप से विकास कार्यों का शुभारंभ किया. कार्यक्रम से पूर्व स्थानीय ग्रामीणों द्वारा जनपद के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों का पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ आत्मीय स्वागत किया गया.
विधिविधान से पूजा-अर्चना कर हुआ शुभारंभ
शिलान्यास से पूर्व विधिविधान के साथ पूजा-अर्चना की गई. प्रस्तावित विकास कार्यों में ग्लास हाउस का निर्माण, कैफेट एरिया, रैलिंग एवं फुटपाथ, बहुउद्देशीय मंच तथा ताल का समग्र सौन्दर्यीकरण शामिल है. इन कार्यों के पूर्ण होने से बधाणीताल को एक आकर्षक और सुव्यवस्थित पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा. विकास कार्यों की कार्यदायी संस्था ग्रामीण निर्माण विभाग, रुद्रप्रयाग है.
परिक्रमा कर दिया सांस्कृतिक संरक्षण का संदेश
कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी प्रतीक जैन, जनप्रतिनिधियों एवं स्थानीय जनमानस ने मातृशक्ति के साथ बधाणीताल की परिक्रमा भी की. इस अवसर पर धार्मिक आस्था, लोक परंपराओं एवं सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण का संदेश दिया गया.
पर्यटन से मिलेगा रोजगार और अर्थव्यवस्था को मजबूती
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने कहा कि बधाणीताल प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण क्षेत्र है और यहां पर्यटन की अपार संभावनाएं मौजूद हैं. उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन का निरंतर प्रयास है कि जनपद के दूरस्थ एवं प्राकृतिक स्थलों को पर्यटन मानचित्र पर सशक्त पहचान दिलाई जाए, ताकि स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलें और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्राप्त हो. जिलाधिकारी ने बधाणीताल के प्राकृतिक सौंदर्य, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व की भी सराहना की.
पर्यावरण संरक्षण पर भी दिया जोर
जिलाधिकारी ने कहा कि पर्यटन विकास के साथ-साथ क्षेत्र की धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का संरक्षण जिला प्रशासन की प्राथमिकता है. उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए ताल में मछलियों को दाना खिलाया और क्षेत्र को स्वच्छ एवं संरक्षित बनाए रखने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि बधाणीताल को केंद्र में रखकर पूरे बांगर क्षेत्र को पर्यटन मानचित्र पर लाना प्रशासन का लक्ष्य है.
पौराणिक महत्व से समृद्ध है बधाणीताल
बधाणीताल, जिसे स्थानीय रूप से विष्णु ताल भी कहा जाता है, पौराणिक कथाओं से समृद्ध है. मान्यता है कि त्रियुगीनारायण में भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह के अवसर पर इस ताल का निर्माण हुआ था. लोककथाओं के अनुसार भगवान विष्णु ने अपनी नाभि से जल निकालकर इस झील का सृजन किया था.
प्राकृतिक सौंदर्य और आस्था का संगम
जखोली स्थित बधाणीताल (बधाणी झील) रुद्रप्रयाग जनपद में समुद्र तल से लगभग 7 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है और रुद्रप्रयाग से करीब 60 किलोमीटर दूर है. यह झील अपनी रंग-बिरंगी मछलियों और धार्मिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है. मान्यता है कि यहां स्नान और दर्शन से पुण्य की प्राप्ति होती है. बैसाखी के अवसर पर यहां हर वर्ष एक स्थानीय मेले का भी आयोजन किया जाता है, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु एवं पर्यटक पहुंचते हैं.







