देहरादून। प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सख्त निर्देशों के बाद उत्तराखंड में अवैध मजारों के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई तेज हो गई है। सीएम के निर्देश के तहत देहरादून शहर और आसपास सरकारी भूमि पर बने अवैध निर्माणों को हटाने का अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में प्रशासन ने बीती रात देहरादून के घंटाघर के पास एचएनबी कॉम्प्लेक्स में बनी अवैध मजार को बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया।
कार्रवाई के दौरान मौके पर भारी पुलिस बल की तैनाती की गई थी, ताकि किसी भी तरह की कानून-व्यवस्था की स्थिति न उत्पन्न हो। नगर प्रशासन, एमडीडीए और नगर निगम की संयुक्त टीम ने देर रात कार्रवाई करते हुए अवैध मजार के साथ-साथ वहां लगे टीन शेड और मलबे को भी हटाया।
भारी पुलिस फोर्स की मौजूदगी में हुई कार्रवाई
इस अभियान के दौरान नगर मजिस्ट्रेट प्रत्यूष सिंह, एसडीएम हरिगिरि, पुलिस अधीक्षक नगर प्रमोद कुमार समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी में पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराई गई।
नगर मजिस्ट्रेट प्रत्यूष सिंह ने बताया कि जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देश पर पहले इस अवैध संरचना का सर्वे कराया गया था। इसके बाद भूमि और निर्माण से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए एमडीडीए की ओर से नोटिस भी जारी किया गया था। तय समय सीमा में वैध दस्तावेज प्रस्तुत न किए जाने के बाद अवैध मजार को हटाने की कार्रवाई की गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि संरचना हटाने के दौरान मौके से किसी भी प्रकार के धार्मिक अवशेष नहीं मिले हैं।
सीएम के निर्देश पर तेज हुआ अतिक्रमण हटाओ अभियान
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में देहरादून जिला प्रशासन के साथ हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने के निर्देश सख्ती से दिए थे। बताया जा रहा है कि देहरादून शहर और उसके आसपास दो दर्जन से अधिक अवैध मजारें सरकारी भूमि पर कब्जा कर बनाई गई हैं, जिन पर प्रशासन की नजर बनी हुई है।
सीएम धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने पूरे उत्तराखंड में सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने का अभियान चला रखा है। अब तक करीब 11 हजार एकड़ सरकारी भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराया जा चुका है। इसके साथ ही प्रदेशभर में 573 अवैध मजारों को हटाया जा चुका है, जो सरकारी जमीन पर कब्जा कर बनाई गई थीं।
उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ वर्षों में सरकारी भूमि पर अवैध रूप से मस्जिद और मजारें बनाए जाने के मामले सामने आए हैं। इनमें से कुछ अवैध निर्माणों को वक्फ बोर्ड में भी दर्ज कराने की बात सामने आई है। प्रशासन का कहना है कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और सरकारी भूमि पर किसी भी तरह का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।







