प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस और विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से लगातार सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग उठाई जा रही है। इसी बीच उत्तराखंड शासन ने जांच के लिए सीबीआई को पत्र भेज दिया है। सीबीआई को पत्र भेजे जाने के बाद आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो गया है, जिससे राजनीतिक बयानबाजी और अधिक उग्र होती नजर आ रही है।
अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर राजनीतिक उथल-पुथल उस वक्त और तेज हो गई, जब अभिनेत्री उर्मिला सनावर की ओर से सोशल मीडिया पर कथित ऑडियो वायरल किए गए। इसके बाद से ही प्रदेशभर में विरोध-प्रदर्शन, धरना और राजनीतिक बयानबाजी का सिलसिला लगातार जारी है। शुरुआती दौर से ही कांग्रेस और कई सामाजिक संगठनों ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की निगरानी में सीबीआई जांच कराए जाने पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि सरकार इस मामले में अंकिता भंडारी के माता-पिता की मांग के अनुरूप ही आगे की कार्रवाई करेगी। इसी वजह से उत्तराखंड सरकार ने सीबीआई को भेजे गए पत्र में वीआईपी की भूमिका की जांच का भी अनुरोध किया है, जो अंकिता के माता-पिता की भावना के अनुरूप बताया जा रहा है। हालांकि, अभी तक सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की निगरानी में सीबीआई जांच कराए जाने को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है, जबकि अंकिता के माता-पिता इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र सौंप चुके हैं।
यही वजह है कि सीबीआई जांच की संस्तुति होने और सीबीआई को पत्र भेजे जाने के बावजूद राजनीतिक घमासान जारी है। सत्ता पक्ष जहां इस फैसले को जन अपेक्षाओं के अनुरूप लिया गया कदम बता रहा है, वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस इस पूरे मामले पर सरकार को लगातार घेरने में जुटी हुई है।
भाजपा का आरोप
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि जब मुद्दे समाप्त हो जाते हैं, तो चीजों को बिगाड़ने के लिए कुछ तंत्र सक्रिय हो जाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस समेत अन्य राजनीतिक दल बाहरी शक्तियों के साथ मिलकर राज्य के माहौल को दूषित करने का काम कर रहे हैं।
‘बाहरी शक्तियों’ के सवाल पर महेंद्र भट्ट ने कहा कि सीबीआई जांच के बाद इसका भी खुलासा हो जाएगा।
कांग्रेस का जवाब
इस मामले पर कांग्रेस भी पूरे जोर-शोर से सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रही है। कांग्रेस विधायक फुरकान अहमद ने कहा कि अंकिता भंडारी राज्य के बाहर की नहीं, बल्कि उत्तराखंड की बेटी थी। ऐसे में यदि विपक्ष उसकी आवाज नहीं उठाएगा, तो फिर किसकी आवाज उठाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा हर मामले में बाहरी शक्तियों का नाम लेना शुरू कर देती है।
फुरकान अहमद ने कहा कि कांग्रेस की स्पष्ट मांग है कि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की अध्यक्षता में सीबीआई जांच समिति गठित की जाए और उनकी निगरानी में जांच हो, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके और वीआईपी का नाम सामने आ सके। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेशभर में हुए विरोध-प्रदर्शनों के बाद ही राज्य सरकार को सीबीआई जांच का निर्णय लेना पड़ा है।
खुलेआम दरांती लहराने और विवादित टिप्पणी के लगे थे आरोप
हाल ही में अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच और कथित वीआईपी की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदेशभर में आंदोलन चल रहा था, जिसमें यूट्यूबर ज्योति अधिकारी भी शामिल थीं। आंदोलन के दौरान उनके कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। एक वीडियो में वह खुलेआम हाथ में दरांती लहराती नजर आईं, जबकि अन्य वीडियो में उत्तराखंड की महिलाओं और देवी-देवताओं को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप लगे थे।
जूही चुफाल ने ज्योति के खिलाफ दी थी तहरीर
हल्द्वानी निवासी जूही चुफाल ने ज्योति अधिकारी की टिप्पणी पर आपत्ति दर्ज कराते हुए मुखानी थाने में तहरीर सौंपी थी। तहरीर के आधार पर मुखानी थाना पुलिस ने यूट्यूबर ज्योति अधिकारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें नोटिस जारी किया था। हालांकि नोटिस मिलने के बाद ज्योति अधिकारी कोर्ट जाने समेत अन्य बातें कहती नजर आई थीं।
5 दिन बाद ज्योति अधिकारी को मिली जमानत
वहीं, 8 जनवरी को मुखानी थाना पुलिस ने ज्योति अधिकारी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया था, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था। इसके बाद उनके अधिवक्ता की ओर से कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की गई।
13 जनवरी को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने जमानत मंजूर कर ली, जिससे ज्योति अधिकारी को बड़ी राहत मिली है।
ज्योति अधिकारी के अधिवक्ता जितेंद्र सिंह बिष्ट ने बताया,
“ज्योति अधिकारी को बेल मिल चुकी है। अब बेल बॉन्ड भरा जा रहा है।”
फिलहाल, सीबीआई जांच की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही अंकिता भंडारी हत्याकांड और उससे जुड़े घटनाक्रम उत्तराखंड की राजनीति और सामाजिक विमर्श के केंद्र में बने हुए हैं, जहां न्याय की मांग के साथ-साथ विवाद और बयानबाजी भी लगातार तेज होती जा रही है।







