रुद्रप्रयाग: अरुणाचल प्रदेश में मातृभूमि की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए रुद्रप्रयाग जनपद के हवलदार रविंद्र सिंह को पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। अलकनंदा–मंदाकिनी के पवित्र संगम पर उनके बड़े भाई दिगंबर राणा और छोटे भाई राहुल राणा ने उन्हें मुखाग्नि दी। हवलदार रविंद्र सिंह को अंतिम विदाई देने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा और पूरा क्षेत्र शोक में डूबा रहा।
जवान का पार्थिव शरीर 19 जनवरी की रात रुद्रप्रयाग स्थित आर्मी कैंप लाया गया, जहां सेना के अधिकारियों और जवानों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद मंगलवार, 20 जनवरी की सुबह करीब 7 बजे सैन्य टुकड़ी ने पूरे सम्मान के साथ पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए उनके पैतृक गांव आगर (दशज्यूला) पहुंचाया।
गांव पहुंचते ही ‘भारत माता की जय’ और ‘शहीद रविंद्र सिंह अमर रहें’ के नारों से वातावरण गूंज उठा। ग्रामीणों, रिश्तेदारों और क्षेत्रवासियों ने नम आंखों से अपने वीर सपूत को अंतिम सलामी दी। हर आंख नम थी और हर दिल गर्व व शोक के भाव से भरा हुआ नजर आया।
भाइयों ने दी मुखाग्नि:
अंतिम संस्कार के दौरान सेना की टुकड़ी ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया और राष्ट्रध्वज में लिपटे पार्थिव शरीर को पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। शहीद को मुखाग्नि उनके बड़े भाई दिगंबर राणा और छोटे भाई राहुल राणा ने दी। इस दौरान परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था, वहीं मौके पर मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम थीं।
बता दें कि 15 गढ़वाल राइफल्स में तैनात 36 वर्षीय हवलदार रविंद्र सिंह मूल रूप से रुद्रप्रयाग जिले के आगर गांव (दशज्यूला पट्टी) के निवासी थे। वह वर्तमान में अरुणाचल प्रदेश के अलोंग क्षेत्र में तैनात थे। बीती 18 जनवरी को ड्यूटी के दौरान उन्हें अचानक हार्ट अटैक आया, जिससे उनका निधन हो गया।
अंतिम दर्शन के बाद जवान का अंतिम संस्कार रुद्रप्रयाग स्थित अलकनंदा–मंदाकिनी संगम पर पूरे सैन्य सम्मान के साथ संपन्न हुआ। 15 गढ़वाल राइफल्स में तैनात शहीद रविंद्र सिंह ने देश सेवा के दौरान अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया, जिससे न केवल उनके गांव बल्कि पूरे जिले में शोक और गर्व का मिला-जुला माहौल बना हुआ है।
केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल भी अंतिम यात्रा और अंत्येष्टि में शामिल हुईं। उन्होंने शहीद के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि यह पूरे क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है। देश ने एक कर्तव्यनिष्ठ और जांबाज सैनिक को खो दिया है, लेकिन उनका साहस, समर्पण और बलिदान सदैव अमर रहेगा।







