देहरादून: चैत्र नवरात्र 19 मार्च से शुरू होने जा रहे हैं। नवरात्र के दौरान व्रत रखने वाले श्रद्धालु बड़ी मात्रा में कुट्टू के आटे से बने पकवानों का सेवन करते हैं। इसी कारण इस दौरान बाजार में कुट्टू के आटे की मांग काफी बढ़ जाती है। मांग बढ़ने के साथ ही मिलावट और पुराने आटे को नए आटे में मिलाकर बेचने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। इसे देखते हुए खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग उत्तराखंड ने सख्ती बढ़ा दी है और एक एडवाइजरी जारी की है।
जारी निर्देशों के अनुसार अब बाजारों में सिर्फ सील पैक कुट्टू के आटे की ही बिक्री की जाएगी। इसके साथ ही पैकेट पर मैन्युफैक्चरिंग डेट और एक्सपायरी डेट लिखना अनिवार्य होगा। खुले में कुट्टू का आटा बेचने पर रोक लगाई गई है।
पिछले साल सैकड़ों लोग हुए थे बीमार
दरअसल, पिछले वर्ष चैत्र नवरात्र के दौरान देहरादून और हरिद्वार जिलों में मिलावटी और खराब कुट्टू का आटा खाने से बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़ गए थे। वर्ष 2025 में नवरात्र के दौरान करीब 300 से अधिक लोग फूड प्वाइजनिंग का शिकार हो गए थे। जांच में सामने आया था कि कुट्टू के आटे की सप्लाई सहारनपुर से की गई थी।
इस घटना के बाद विभाग ने प्रदेशभर में बड़े स्तर पर जांच अभियान चलाया था। फूड इंस्पेक्टरों ने कई दुकानों पर छापेमारी कर कुट्टू के आटे के सैंपल भी एकत्रित किए थे।
फूड इंस्पेक्टरों को दिए गए सख्त निर्देश
इस बार ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए विभाग पहले से ही सतर्क हो गया है। सभी फूड इंस्पेक्टरों को बाजारों में नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। इसी क्रम में विभाग ने व्यापारियों और उद्योग व्यापार मंडल के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर उन्हें दिशा-निर्देशों की जानकारी दी।
बैठक में यह भी कहा गया कि कुट्टू आटे के निर्माता और वितरक अच्छी गुणवत्ता वाली कुट्टू गिरी का ही इस्तेमाल करें और खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करें।
अधिकारियों ने की सावधानी बरतने की अपील
ईटीवी भारत से बातचीत में ताजबर सिंह जग्गी ने बताया कि पिछले साल कुट्टू का आटा खाने से देहरादून और हरिद्वार में कई लोग बीमार पड़ गए थे। इसी को देखते हुए नवरात्र से पहले ही अधिकारियों को अलर्ट कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि विभाग लगातार बाजारों पर नजर रखेगा और स्थानीय व्यापारियों को भी एफडीए की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने के लिए जागरूक किया जा रहा है, ताकि व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को सुरक्षित और शुद्ध खाद्य सामग्री मिल सके।







