उत्तराखंड में मौसम के अचानक बदले मिजाज ने जहां एक ओर लोगों को गर्मी से राहत दी है, वहीं दूसरी ओर किसानों और बागवानों की चिंता बढ़ा दी है। उत्तरकाशी और मसूरी में हुई बारिश और ओलावृष्टि ने फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है, जिससे किसानों की मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है।
उत्तरकाशी जिले में शनिवार (4 अप्रैल) को हुई तेज बारिश और ओलावृष्टि ने सेब बागवानों को बड़ा झटका दिया है। इस समय बागानों में सेब की फ्लोरिंग का दौर चल रहा है, ऐसे में ओलों की मार से फूल झड़ गए हैं, जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ने की आशंका है। खासतौर पर पल्ली मुंगरसन्ति के धारी कफनौल क्षेत्र में सेब, आड़ू, पुलम और खुमानी की फसल को भारी नुकसान हुआ है।
तेज आंधी और ओलावृष्टि के कारण सेब की सुरक्षा के लिए लगाई गई जालियां तक फट गईं, वहीं कई पेड़ों की टहनियां टूट गईं। इसके अलावा गेहूं, टमाटर, मटर, फ्रेंचबीन, प्याज और लहसुन जैसी फसलें भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। स्थानीय बागवानों का कहना है कि अचानक आए इस मौसम ने उनकी पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया है और यदि मौसम ऐसा ही बना रहा तो नुकसान और बढ़ सकता है।
बागवानों ने शासन-प्रशासन से नुकसान का सर्वे कर उचित मुआवजा देने की मांग की है। उनका कहना है कि बागवानी ही उनकी आजीविका का मुख्य साधन है और इस तरह की प्राकृतिक आपदा उन्हें आर्थिक संकट में डाल सकती है। ग्रामीणों ने कृषि और उद्यान विभाग से मौके पर पहुंचकर स्थिति का आकलन करने और राहत प्रदान करने की अपील की है।
वहीं दूसरी ओर मसूरी में भी शनिवार शाम को मौसम ने अचानक करवट ली। तेज बारिश और ओलावृष्टि के चलते तापमान में गिरावट दर्ज की गई, जिससे ठंड बढ़ गई और लोगों को एक बार फिर गर्म कपड़ों का सहारा लेना पड़ा। हालांकि इस बदलाव ने किसानों की चिंता जरूर बढ़ा दी है, क्योंकि मटर समेत कई फसलें प्रभावित हुई हैं।
इसके विपरीत, मसूरी पहुंचे पर्यटकों के लिए यह मौसम किसी उत्सव से कम नहीं रहा। माल रोड पर कुछ देर के लिए बर्फ जैसी सफेद चादर बिछ गई, जिसे देखकर सैलानी रोमांचित हो उठे। देश के अलग-अलग हिस्सों से आए पर्यटकों ने इस नजारे का जमकर आनंद लिया और इसे अपने कैमरों में कैद किया।
मौसम विभाग ने आने वाले दिनों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार ऊंचाई वाले इलाकों में बारिश और बर्फबारी की संभावना बनी हुई है। प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है।







