उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में मंगलवार, 28 अप्रैल को राजनीतिक और सामाजिक हलचल एक साथ देखने को मिली. एक ओर विधानसभा में ‘नारी शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम’ को लेकर विशेष सत्र बुलाया गया, तो वहीं दूसरी ओर सड़क पर अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर लोगों का आक्रोश फूट पड़ा. सरकार और विपक्ष के बीच सदन के भीतर तीखी बहस जारी रही, जबकि बाहर प्रदर्शनकारियों ने न्याय की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया.
विधानसभा में निंदा प्रस्ताव, कांग्रेस पर निशाना
विशेष सत्र के दौरान सत्तापक्ष ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित न होने का ठीकरा विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस पर फोड़ा. सरकार ने इस मुद्दे को महिलाओं के अधिकारों से जोड़ते हुए विपक्ष की भूमिका पर सवाल उठाए. वहीं कांग्रेस ने भी सरकार पर जवाबी हमला करते हुए इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगाया.
अंकिता हत्याकांड पर सड़कों पर उबाल
विधानसभा के बाहर अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर भारी आक्रोश देखने को मिला. “अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच” के बैनर तले बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे और न्याय की मांग को लेकर विधानसभा कूच किया. प्रदर्शनकारी हरिद्वार रोड स्थित एलआईसी बिल्डिंग से रैली निकालते हुए आगे बढ़े, लेकिन पुलिस ने रिस्पना पुल से पहले बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक दिया.
इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जब तक अंकिता को न्याय नहीं मिलता और कथित वीआईपी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा.
सरकार पर गंभीर आरोप
संघर्ष मंच की सदस्य कमला पंत ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि “नारी शक्ति वंदन” के नाम पर एक दिन का विशेष सत्र बुलाना केवल दिखावा है. उनका कहना था कि अंकिता भंडारी हत्याकांड को तीन साल से अधिक समय हो चुका है, लेकिन अब तक मुख्य आरोपी बताए जा रहे वीआईपी के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है.
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार वीआईपी आरोपियों को संरक्षण दे रही है और मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है. कमला पंत ने चेतावनी दी कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला, तो यह आंदोलन पूरे देश में फैलाया जाएगा.
राज्य की नीतियों पर भी उठे सवाल
प्रदर्शनकारियों ने राज्य की विकास नीतियों और “रिजॉर्ट कल्चर” पर भी सवाल उठाए. उनका कहना था कि पहाड़ की बेटियों के साथ हो रहे अपराध बढ़ रहे हैं और सरकार इन मामलों में गंभीरता नहीं दिखा रही है. उन्होंने दावा किया कि उत्तराखंड महिला अपराध के मामलों में हिमालयी राज्यों में शीर्ष पर पहुंच गया है, जो चिंता का विषय है.
राजनीतिक माहौल गरमाया
एक तरफ विधानसभा के भीतर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने दिखे, तो दूसरी ओर सड़कों पर जनता का गुस्सा सरकार के लिए चुनौती बनकर सामने आया. नारी सशक्तिकरण के मुद्दे पर बुलाए गए विशेष सत्र के बीच अंकिता हत्याकांड ने पूरे राजनीतिक विमर्श को प्रभावित कर दिया है.
अब देखने वाली बात होगी कि सरकार इस मामले में आगे क्या कदम उठाती है और क्या प्रदर्शनकारियों की मांगों पर कोई ठोस निर्णय लिया जाता है या नहीं.







