देहरादून सचिवालय में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की महत्वपूर्ण बैठक जारी है. इस बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसमें स्वास्थ्य, परिवहन, शिक्षा, ऊर्जा, खेल और नियोजन विभाग समेत कई विभागों से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगने की संभावना है. प्रदेश सरकार की आगामी नीतियों और प्रशासनिक फैसलों की दिशा तय करने वाली इस बैठक पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं.
सूत्रों के अनुसार बैठक में ऊर्जा संसाधनों के कम उपयोग को लेकर बड़ा फैसला लिया जा सकता है. हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से ऊर्जा बचत और अगले एक वर्ष तक सोना नहीं खरीदने की अपील की थी. इसका असर उत्तराखंड में भी देखने को मिला है, जहां मंत्री और विधायक अपने काफिलों की जगह दोपहिया वाहनों का उपयोग करते नजर आए. ऐसे में सरकार अब सरकारी कार्यालयों में वाहनों के अनावश्यक उपयोग पर रोक लगाने और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देने जैसे फैसले ले सकती है.
कैबिनेट बैठक में पिछले तीन दिनों से जारी नर्सिंग बेरोजगारों के उग्र आंदोलन पर भी चर्चा होने की संभावना है. नर्सिंग एकता मंच के बैनर तले अभ्यर्थी पिछले साढ़े पांच महीने से अपनी मांगों को लेकर धरना दे रहे हैं. मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई न होने से नाराज बेरोजगार अब पानी की टंकी पर चढ़कर प्रदर्शन कर रहे हैं. ऐसे में सरकार आंदोलन समाप्त कराने और नर्सिंग अभ्यर्थियों को राहत देने के लिए कोई ठोस निर्णय ले सकती है.
इसके अलावा नियोजन विभाग द्वारा तैयार की गई कई नई नीतियों को भी मंत्रिमंडल की मंजूरी मिल सकती है. वहीं प्रदेश के अशासकीय स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों के वेतन का मुद्दा भी बैठक में उठ सकता है. जानकारी के मुताबिक राज्य के करीब 400 अशासकीय स्कूलों में तैनात 8 हजार से अधिक शिक्षक और कर्मचारी पिछले तीन महीनों से वेतन का इंतजार कर रहे हैं. ऐसे में सरकार इस मामले में जरूरी दिशा-निर्देश जारी कर सकती है.
स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर भी कैबिनेट की मुहर लगने की संभावना जताई जा रही है. इसके साथ ही शिक्षा, ऊर्जा, लोक निर्माण विभाग और अन्य विभागों से संबंधित विकास योजनाओं और प्रशासनिक प्रस्तावों पर भी चर्चा जारी है.
माना जा रहा है कि धामी सरकार की यह कैबिनेट बैठक प्रदेश के कर्मचारियों, बेरोजगार युवाओं, शिक्षकों और आम जनता से जुड़े कई बड़े फैसलों का रास्ता साफ कर सकती है. अब सभी की निगाहें बैठक में लिए जाने वाले अंतिम निर्णयों पर टिकी हुई हैं.







