हरिद्वार: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील का असर अब उत्तराखंड में भी दिखाई देने लगा है. हरिद्वार में जिलाधिकारी मयूर दीक्षित समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों ने सरकारी वाहन छोड़ पैदल और दोपहिया वाहनों से कार्यालय पहुंचकर एक नई पहल की शुरुआत की. अधिकारियों की इस पहल को लेकर जिले में चर्चा तेज है और इसे ऊर्जा संरक्षण की दिशा में सकारात्मक कदम माना जा रहा है.
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में अधिकारियों और आम नागरिकों से गैर जरूरी कार्यों के लिए वाहनों का कम इस्तेमाल करने, पैदल चलने, पब्लिक ट्रांसपोर्ट अपनाने और जरूरत पड़ने पर वर्क फ्रॉम होम जैसे विकल्पों को अपनाने की अपील की थी. पीएम की इस अपील के बाद हरिद्वार प्रशासन में भी बदलाव साफ नजर आया.
हरिद्वार के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित अपने सरकारी वाहन को छोड़ पैदल ही कार्यालय पहुंचे. उनके साथ सुरक्षाकर्मी और अर्दली भी पैदल नजर आए. डीएम को पैदल आते देख कई अधिकारी और कर्मचारी भी प्रेरित हुए और उन्होंने भी कारों की बजाय पैदल या दोपहिया वाहनों से दफ्तर पहुंचना शुरू कर दिया.
हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण के सचिव मनीष सिंह, मुख्य विकास अधिकारी ललित नारायण मिश्रा और नगर आयुक्त नंदन कुमार भी जिला कलेक्ट्रेट में आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बैठक में पैदल पहुंचते दिखाई दिए. वहीं जिला पर्यटन अधिकारी सुशील नौटियाल स्कूटी से कार्यालय पहुंचे और बाद में चारधाम पंजीकरण केंद्र का निरीक्षण करने भी स्कूटी से ही रवाना हुए.
डीएम मयूर दीक्षित ने कहा कि प्रधानमंत्री की अपील के बाद सरकारी वाहनों के सीमित उपयोग को लेकर अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रेरित किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि जिन अधिकारियों के आवास कार्यालय के पास हैं, वे पैदल या वैकल्पिक साधनों से दफ्तर पहुंच सकते हैं. इससे न केवल पेट्रोल-डीजल की बचत होगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी.
उन्होंने कहा कि वे स्वयं अपने आवास से कलेक्ट्रेट तक पैदल आना-जाना करेंगे ताकि अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी इसका अनुसरण करें. साथ ही आम लोगों से भी ईंधन बचाने और अनावश्यक वाहन उपयोग से बचने की अपील की जाएगी.
हरिद्वार के रोशनाबाद स्थित कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास कई अधिकारियों के सरकारी आवास बने हुए हैं. ऐसे में एक किलोमीटर के दायरे में रहने वाले कई अधिकारी बिना वाहन के ही कार्यालय पहुंचे. कुछ अधिकारियों ने चौपहिया वाहन छोड़ दोपहिया वाहनों को प्राथमिकता दी.
बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने काफिले में भी वाहनों की संख्या कम की है और भाजपा शासित राज्यों के मंत्रियों, पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं से भी ईंधन बचत अभियान को जन आंदोलन बनाने की अपील की है. हालांकि आम जनता के बीच इसका असर अभी सीमित नजर आ रहा है, लेकिन हरिद्वार प्रशासन में इसकी शुरुआत ने एक नई चर्चा जरूर छेड़ दी है.
ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा को लेकर प्रशासन की यह पहल आने वाले समय में अन्य जिलों के लिए भी उदाहरण बन सकती है.







