देहरादून: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी के निधन के बाद पूरे प्रदेश में शोक की लहर है। मंगलवार को उनका पार्थिव शरीर देहरादून स्थित मैक्स अस्पताल से रवाना कर दिया गया। जानकारी के अनुसार, पार्थिव शरीर की अंतिम चिकित्सीय जांच सैनिक अस्पताल में की जाएगी, जिसके बाद उसे उनके देहरादून स्थित वसंत विहार आवास ले जाया जाएगा।
बताया जा रहा है कि बुधवार को हरिद्वार में राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। सुबह करीब 10 बजे उनकी अंतिम यात्रा निकलेगी, जिसमें बड़ी संख्या में राजनीतिक, सामाजिक और सैन्य क्षेत्र से जुड़े लोग शामिल हो सकते हैं।
भुवन चंद्र खंडूड़ी लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। वह हृदय संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे और पिछले कई महीनों से देहरादून के मैक्स अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। मंगलवार को 91 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सामने आते ही उत्तराखंड समेत देशभर में शोक की भावना फैल गई।
उत्तराखंड की राजनीति में भुवन चंद्र खंडूड़ी को एक ईमानदार, अनुशासित और साफ छवि वाले नेता के रूप में जाना जाता था। पहाड़ी प्रदेश उत्तराखंड, जिसे सैन्य भूमि के रूप में भी पहचान मिली है, वहां खंडूड़ी को एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व माना जाता रहा। सेना से लेकर राजनीति तक का उनका सफर अनुशासन, सादगी और जनसेवा की मिसाल माना जाता है।
उन्होंने भारतीय सेना में सेवाएं देते हुए देश की सीमाओं की रक्षा की और बाद में राजनीति में आकर आम लोगों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया और पारदर्शी प्रशासन की पहचान बनाई।
भुवन चंद्र खंडूड़ी का निधन केवल एक वरिष्ठ नेता का जाना नहीं माना जा रहा, बल्कि उत्तराखंड की राजनीति के एक महत्वपूर्ण अध्याय के अंत के रूप में देखा जा रहा है। उनकी सादगी, व्यक्तिगत ईमानदारी और अनुशासित जीवनशैली ने उन्हें जनता के बीच विशेष पहचान दिलाई।
आज उत्तराखंड के गांवों से लेकर शहरों तक उनके निधन पर गहरा दुख और खामोशी का माहौल है। राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और आम लोगों द्वारा उन्हें श्रद्धांजलि दी जा रही है।







