रुद्रप्रयाग: गौ संरक्षण, सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार और भारतीय संस्कृति के संवर्धन का संदेश लेकर गुजरात के सोमनाथ क्षेत्र से निकले दो युवा साइकिल यात्री विश्वविख्यात कार्तिक स्वामी तीर्थ पहुंच गए हैं। करीब 5 हजार किलोमीटर की लंबी और चुनौतीपूर्ण साइकिल यात्रा पूरी कर हिमालय की गोद में स्थित कार्तिक स्वामी धाम पहुंचने पर दोनों युवाओं का स्थानीय लोगों, मंदिर समिति, व्यापारियों और श्रद्धालुओं ने गर्मजोशी के साथ स्वागत किया।
गुजरात के सोमनाथ निवासी 20 वर्षीय सियाल निकुल और उनके साथी जगदीश ने बताया कि उन्होंने 14 फरवरी से अपनी जनजागरण यात्रा की शुरुआत की थी। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाने के लिए जनसमर्थन जुटाना, गौ संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना तथा भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं के संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुंचाना है।
युवाओं ने बताया कि यात्रा के दौरान वे विभिन्न राज्यों, धार्मिक स्थलों और ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों को गौ सेवा, पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक विरासत और नैतिक मूल्यों के महत्व के बारे में जागरूक कर रहे हैं। उनका कहना है कि समाज में सांस्कृतिक मूल्यों और परंपराओं को मजबूत करने के लिए युवाओं की सक्रिय भागीदारी बेहद जरूरी है।
करीब पांच हजार किलोमीटर की कठिन यात्रा के बाद कार्तिक स्वामी धाम पहुंचना दोनों युवाओं के लिए एक विशेष आध्यात्मिक अनुभव साबित हुआ। उन्होंने कहा कि हिमालय की शांत वादियों और दिव्य वातावरण में स्थित यह पवित्र तीर्थ उन्हें नई ऊर्जा, आत्मिक शांति और आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रहा है।
कार्तिक स्वामी मंदिर में पहुंचकर दोनों यात्रियों ने भगवान कार्तिकेय के दर्शन किए और पूजा-अर्चना कर देश, समाज और विश्व कल्याण की कामना की। उन्होंने बताया कि कार्तिक स्वामी धाम के दर्शन के बाद वे पंचकेदार यात्रा पर रवाना होंगे और इसके बाद भगवान बदरी विशाल के दर्शन कर अपनी यात्रा को आगे बढ़ाएंगे।
कार्तिकेय मंदिर समिति के अध्यक्ष बिक्रम सिंह नेगी, पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य मगन सिंह नेगी, अर्जुन सिंह नेगी तथा सामाजिक कार्यकर्ता पंकज सिंह नेगी सहित क्षेत्र के अनेक लोगों ने दोनों युवाओं का स्वागत किया। उन्होंने युवाओं के साहस, दृढ़ संकल्प और धार्मिक आस्था की सराहना करते हुए कहा कि वर्तमान दौर में जब युवा पीढ़ी तेजी से भौतिकवाद की ओर आकर्षित हो रही है, ऐसे समय में समाज, संस्कृति और गौ संरक्षण जैसे विषयों को लेकर हजारों किलोमीटर की यात्रा करना अत्यंत प्रेरणादायक पहल है।
कार्तिक स्वामी तीर्थ पहुंचे श्रद्धालुओं और यात्रियों ने भी दोनों युवाओं से मुलाकात कर उनकी यात्रा के अनुभव सुने और उनके अभियान की सराहना की। युवाओं ने कहा कि पंचकेदार और बदरीनाथ यात्रा पूर्ण करने के बाद वे अपने गृह क्षेत्र लौटेंगे और गौ संरक्षण, पर्यावरण जागरूकता तथा सांस्कृतिक जनजागरण के लिए इसी तरह अभियान चलाते रहेंगे।
हिमालय की ऊंचाइयों तक पहुंचा गौ संरक्षण और सांस्कृतिक जागरण का यह संदेश अब अनेक लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनता जा रहा है। युवाओं की यह अनूठी और साहसिक यात्रा न केवल सनातन संस्कृति के प्रति उनकी आस्था को दर्शाती है, बल्कि समाज को सकारात्मक दिशा देने का भी प्रयास है।






