देहरादून: उत्तराखंड खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FDA) द्वारा मिलावटखोरी के खिलाफ लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं, ताकि आम जनता को शुद्ध और सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराया जा सके। बदलती जीवनशैली, फूड डिलीवरी ऐप्स और रेडी-टू-ईट संस्कृति के बढ़ते चलन के कारण बड़ी आबादी बाजार के भोजन पर निर्भर होती जा रही है। खासतौर पर युवा पीढ़ी में बाहर के खाने का चलन तेजी से बढ़ा है, जिसका सीधा असर स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।
इसी गंभीर चुनौती को देखते हुए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने वर्ष 2018 में देशव्यापी RUCO (Repurpose Used Cooking Oil) मिशन की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य इस्तेमाल किए गए खाद्य तेल को दोबारा खाद्य श्रृंखला में लौटने से रोकना और उसे बायोफ्यूल जैसे गैर-खाद्य उपयोगों में परिवर्तित करना है। उत्तराखंड में इस अभियान ने बीते पांच वर्षों में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।
बार-बार गर्म किया गया तेल बनता है गंभीर बीमारियों का कारण
होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों में एक बार इस्तेमाल किए गए तेल को फिर से पकाने में उपयोग करने की प्रवृत्ति आम होती जा रही है। जबकि विशेषज्ञों के अनुसार बार-बार गर्म किए गए तेल में एल्डीहाइड्स और अन्य जहरीले रसायन बनते हैं, जो हृदय रोग, कैंसर और हाई ट्रांस फैट जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ा देते हैं।
अपर आयुक्त FDA ताजबर सिंह जग्गी ने बताया कि दोबारा गर्म किया गया तेल कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है और हार्ट अटैक व हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों का प्रमुख कारण बनता है। ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) की वर्ष 2022 की रिपोर्ट के अनुसार शहरी भारत में लगभग 60 प्रतिशत खाना पकाने का तेल एक बार प्रयोग के बाद भी दोबारा खाद्य श्रृंखला में लौट आता है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है।
उत्तराखंड में RUCO मॉडल बना मिसाल
वर्ष 2019 में उत्तराखंड में RUCO मॉडल लागू किया गया था। शुरुआती दौर में जहां मात्र 600 लीटर इस्तेमाल किया गया तेल एकत्र किया गया था, वहीं पांच वर्षों में यह आंकड़ा बढ़कर 1,06,414 लीटर तक पहुंच गया है। यह तेल बायोफ्यूल में परिवर्तित किया गया, जिससे पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिली है।
साथ ही वर्ष 2025 की चारधाम यात्रा को भी इसी थीम पर आयोजित किया गया। यात्रा मार्ग पर खाद्य तेल के पुनः उपयोग को रोकने के लिए खाद्य कारोबारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया और जागरूकता कार्यक्रम चलाए गए। इस दौरान करीब 1,200 लीटर इस्तेमाल किया गया तेल एकत्र कर बायोफ्यूल में बदला गया।
गढ़वाल और कुमाऊं में लागू होगा दून मॉडल
अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी ने बताया कि उत्तराखंड खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन आने वाले वर्षों में इस अभियान को और तेज़ गति से आगे बढ़ाएगा। ‘दून मॉडल’ को ईट राइट इंडिया और RUCO पहल के तहत एक अभिनव प्रणाली के रूप में विकसित किया गया है, जिसकी सराहना FSSAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने भी की है।
अब इस मॉडल को गढ़वाल और कुमाऊं मंडल में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इसका मुख्य लक्ष्य खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता और इस्तेमाल किए गए खाना पकाने के तेल के सुरक्षित निस्तारण को बढ़ावा देना है।







