देहरादून में भिक्षावृत्ति, बाल श्रम और कूड़ा बीनने जैसी गतिविधियों से रेस्क्यू किए गए बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में जिला प्रशासन लगातार प्रयास कर रहा है। इसी क्रम में शनिवार को इंटेंसिव केयर सेंटर (आईसीसी) में रखे गए 27 बच्चों को विभिन्न स्कूलों में प्रवेश दिलाया गया।
प्रशासन के अनुसार अब तक भिक्षावृत्ति, बाल श्रम और कूड़ा बीनने में लिप्त कुल 276 बच्चों को रेस्क्यू किया जा चुका है। इनमें से 154 बच्चों को पढ़ाई जैसी आवश्यक मुख्यधारा से जोड़ा गया है। शनिवार को आढ़त बाजार स्थित साधुराम इंटर कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी सविन बंसल ने 27 बच्चों को स्टेशनरी और स्कूल यूनिफॉर्म वितरित कर उन्हें अलग-अलग स्कूलों में दाखिला दिलाया।
इन 27 बच्चों में से 10 बच्चों का प्रवेश प्राथमिक विद्यालय परेड ग्राउंड में कराया गया, जबकि 17 बच्चों को साधुराम इंटर कॉलेज में नामांकित किया गया। इस अवसर पर डीएम सविन बंसल ने कहा कि समाज में कई ऐसे परिवार हैं जो विभिन्न कारणों से मुख्यधारा से वंचित रह जाते हैं। ऐसे परिवारों से जुड़े बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए जिला प्रशासन निरंतर प्रयासरत है।
डीएम ने कहा कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, बच्चों की पढ़ाई पूरी कराना प्रशासन का मुख्य लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि भिक्षावृत्ति और बाल श्रम से जुड़े बच्चों को सीधे स्कूल भेजने से पहले उनका व्यवहार परिवर्तन करना बेहद जरूरी होता है, ताकि वे दोबारा अपनी पुरानी गतिविधियों की ओर न लौटें। इस प्रक्रिया में बच्चों और उनके अभिभावकों को समझाने के साथ-साथ बच्चों के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने में लगभग तीन से चार महीने का समय लगता है।
उन्होंने जानकारी दी कि बच्चों को मानसिक रूप से सशक्त बनाने के बाद विभिन्न सरकारी स्कूलों में दाखिल कराया जाता है। यह पूरा प्रोजेक्ट तीन चरणों में संचालित किया जा रहा है। पहले चरण में रेस्क्यू एंड रिकवरी के तहत तीन समर्पित वाहन देहरादून के प्रमुख चौक-चौराहों पर पेट्रोलिंग करते हैं। यदि कोई बच्चा भिक्षावृत्ति करते हुए पाया जाता है तो उसे इंटेंसिव केयर सेंटर लाया जाता है।
दूसरे चरण में आईसीसी सेंटर में बच्चों को तीन से चार महीने तक खेलकूद और अन्य गतिविधियों के माध्यम से मानसिक रूप से सशक्त किया जाता है। इसके बाद तीसरे चरण में बच्चों को इंटेंसिव केयर से हटाकर शिक्षकों की निगरानी में पढ़ाई के लिए विभिन्न स्कूलों में स्थानांतरित कर दिया जाता है। जिला प्रशासन का यह प्रयास बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।







