उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर प्रदेशभर में जन आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है. इसी क्रम में शुक्रवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सूबे की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के रामलीला मैदान में एकत्रित होकर बीजेपी सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी का नाम उजागर करने और उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर जमकर नारेबाजी की.
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्य चौराहे से डाकबंगला रोड, तहसील रोड होते हुए मुख्य बाजार तक रैली निकाली. रैली के दौरान सरकार विरोधी नारे लगाए गए और भाजपा नेताओं व सरकार का पुतला दहन किया गया. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार इस पूरे मामले में एक प्रभावशाली वीआईपी को बचाने का काम कर रही है.
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर की कथित पत्नी द्वारा अंकिता भंडारी हत्याकांड में शामिल वीआईपी का नाम उजागर किया गया है, लेकिन इसके बावजूद सरकार उस पर कार्रवाई करने के बजाय चुप्पी साधे हुए है. इससे जनता में रोष बढ़ता जा रहा है.
सीबीआई जांच की मांग
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेसियों ने अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच कराने की मांग की. नगर पंचायत अध्यक्ष मोहन भंडारी ने कहा कि इस मामले में लंबे समय से वीआईपी का नाम सामने लाने की मांग होती रही है, लेकिन सरकार लगातार उसे बचाने का प्रयास करती रही. अब जब वीआईपी का नाम खुलकर सामने आया है, तब भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है.
मोहन भंडारी ने कहा कि प्रदेश की जनता को अब सरकार से न्याय मिलने की उम्मीद नहीं रह गई है, इसलिए जनता सड़कों पर उतरकर सरकार को जवाब देने के लिए मजबूर हो रही है.
न्याय मिलने तक जारी रहेगा आंदोलन
कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष दान सिंह नेगी ने कहा कि बहन अंकिता भंडारी को न्याय मिलने तक कांग्रेस का आंदोलन जारी रहेगा. यदि सरकार ने जल्द ही वीआईपी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और उग्र किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी.
वहीं कांग्रेस नगर अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह बिष्ट ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर जल्द अंकिता भंडारी को न्याय नहीं मिला, तो आने वाले समय में गैरसैंण में किसी भी सरकार के मंत्री को प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा और उनका पुरजोर विरोध किया जाएगा.
इस प्रदर्शन ने एक बार फिर अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर सरकार पर सवाल खड़े कर दिए हैं और प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज कर दी है.







