रुद्रप्रयाग: बदरी–केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) की ओर से बदरीनाथ और केदारनाथ धाम में गैर हिंदुओं के प्रवेश को वर्जित करने के लिए लाए जा रहे प्रस्ताव का तीर्थ पुरोहित समाज ने जोरदार स्वागत किया है। केदारनाथ धाम के तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि इस निर्णय से न केवल दोनों धामों की धार्मिक पवित्रता और परंपराएं सुरक्षित रहेंगी, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था भी पहले से अधिक सुदृढ़ होगी।
केदारनाथ धाम के तीर्थ पुरोहित एवं चारधाम तीर्थ पुरोहित महासंगठन के उपाध्यक्ष संतोष त्रिवेदी ने इस पहल को प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की दूरदर्शी सोच का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि तीर्थ पुरोहित समाज इस निर्णय का पूर्ण समर्थन करता है और इसे सफल बनाने के लिए एकजुट होकर सहयोग करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व में भी इस तरह की पहल हुई थी, लेकिन वह किसी कारणवश धरातल पर नहीं उतर सकी। इस बार उम्मीद है कि प्रस्ताव को अमलीजामा पहनाया जाएगा, जिससे पवित्र धामों की गरिमा, परंपरा और सुरक्षा को संरक्षित किया जा सके।
तीर्थ पुरोहित समाज का मानना है कि इस निर्णय से धार्मिक स्थलों की मर्यादा बनी रहेगी और श्रद्धालुओं में धार्मिक अनुशासन एवं आस्था की भावना और अधिक मजबूत होगी। उनका कहना है कि चारधाम जैसे पवित्र स्थलों की पहचान और धार्मिक परंपराओं को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।
गौरतलब है कि इससे पहले गंगोत्री धाम में गंगोत्री मंदिर समिति द्वारा गैर हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया जा चुका है। वहीं हरिद्वार के हरकी पैड़ी समेत अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों पर भी गैर हिंदुओं की एंट्री पर रोक लगाने की मांग समय-समय पर उठती रही है। इसी कड़ी में बदरी–केदार मंदिर समिति ने भी अपने अधीन आने वाले सभी मंदिरों में गैर हिंदुओं के प्रवेश को वर्जित करने का निर्णय लिया है, जिसे आगामी बीकेटीसी बोर्ड बैठक में प्रस्ताव के रूप में पारित किया जाना है।
पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश के धार्मिक, पौराणिक स्थलों और देवस्थानों का संचालन व देखरेख करने वाले सभी धार्मिक संगठनों की राय और सुझावों के अनुरूप ही सरकार आगे कदम बढ़ाएगी। उन्होंने कहा कि सभी पौराणिक स्थलों से जुड़े पूर्व में बने कानूनों का अध्ययन किया जा रहा है और उन्हीं के आधार पर सरकार आगे निर्णय लेगी।
कुल मिलाकर, बदरीनाथ और केदारनाथ धाम में गैर हिंदुओं के प्रवेश को वर्जित करने को लेकर लाए जा रहे प्रस्ताव को तीर्थ पुरोहित समाज का व्यापक समर्थन मिल रहा है, और इसे धामों की पवित्रता व परंपराओं की रक्षा की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।







