उत्तरकाशी जनपद के विकासखंड डुंडा अंतर्गत ग्राम सभा सौंदी की विभिन्न ज्वलंत समस्याओं को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी प्रशांत आर्य से मुलाकात कर समाधान की मांग उठाई। ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम सभा सौंदी अभी तक उत्तरकाशी जनपद के मनरेगा पोर्टल से सही रूप से संबद्ध नहीं हो पाई है, जिससे रोजगार संबंधी कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
ग्रामीणों ने अवगत कराया कि 30 नवम्बर 2023 से ग्राम सभा सौंदी को आधिकारिक रूप से उत्तरकाशी जनपद में सम्मिलित किया गया है, लेकिन तकनीकी और अभिलेखी त्रुटियों के चलते गांव अब तक शासकीय योजनाओं से पूर्ण रूप से नहीं जुड़ पाया है। ग्रामवासियों के आधार कार्ड में निवास स्थान अब भी टिहरी गढ़वाल दर्ज है, जिसके कारण निवास विवरण में संशोधन नहीं हो पा रहा है। समाज कल्याण विभाग को छोड़ अधिकांश विभागों से गांव को योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा, जिससे विकास कार्य बाधित हैं।
विधानसभा क्षेत्र को लेकर भी संशय
ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि ग्राम सभा सौंदी के मतदाता किस विधानसभा क्षेत्र में मतदान करेंगे। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि सौंदी को विधिवत गंगोत्री विधानसभा क्षेत्र, जनपद उत्तरकाशी में शामिल किया जाए।
इसके अलावा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत ग्राम सिलोड़ा से सौंदी को जोड़ने हेतु सड़क स्वीकृत कर निर्माण कार्य शुरू करने, विधायक निधि व्यय की प्रशासनिक अनुमति प्रदान करने सहित अन्य मांगें भी जिलाधिकारी के समक्ष रखी गईं।
दो वर्षों से लटके विकास कार्य
सौंदी गांव के पूर्व प्रधान जीतम सिंह रावत, आनंद सिंह पंवार और जयपाल सिंह चौहान ने बताया कि गांव दो वर्ष पूर्व उत्तरकाशी जनपद के डुंडा ब्लॉक में शामिल हो चुका है, लेकिन वर्तमान में अधिकांश विभागों का संचालन अब भी टिहरी जनपद से हो रहा है। इससे ग्रामीणों को छोटे-बड़े कार्यों के लिए टिहरी मुख्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं और विकास कार्य अधर में लटके हुए हैं।
ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि सभी विभागों का संचालन पूर्ण रूप से उत्तरकाशी जनपद से किया जाए, ताकि ग्रामीणों को सुविधा मिल सके और अनावश्यक परेशानी से बचा जा सके।
जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि मामले में जल्द आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। वहीं ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो पूरे गांव के लोग जिला कलेक्ट्रेट उत्तरकाशी परिसर में धरना देने को बाध्य होंगे।







