देहरादून: संघ लोक सेवा आयोग की प्रतिष्ठित UPSC Civil Services Examination में उत्तराखंड की बेटियों ने शानदार प्रदर्शन कर प्रदेश का मान बढ़ाया है। किच्छा की Shambhavi Tiwari ने 46वीं रैंक हासिल की है, जबकि टिहरी चंबा की रहने वाली Meenal Negi ने 66वीं रैंक प्राप्त कर जिले और पूरे राज्य का नाम रोशन किया है।
इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने दोनों प्रतिभाशाली बेटियों से फोन पर बातचीत कर उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं।
सीएम धामी ने दी बधाई
मुख्यमंत्री धामी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर लिखा कि यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में उत्तराखंड की बेटियों की यह सफलता प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि किच्छा की शांभवी तिवारी का 46वीं और टिहरी गढ़वाल की मीनल नेगी का 66वीं रैंक हासिल करना अत्यंत गौरवपूर्ण उपलब्धि है।
उन्होंने कहा कि यह सफलता प्रदेश के युवाओं, विशेषकर बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि दोनों प्रतिभाशाली बेटियां अपनी मेहनत, प्रतिभा और समर्पण से देश सेवा के मार्ग पर नए कीर्तिमान स्थापित करेंगी।
टिहरी की बेटी मीनल नेगी की प्रेरणादायक कहानी
मीनल नेगी मूल रूप से टिहरी जिले के चंबा ब्लॉक के दिवाड़ा गांव की रहने वाली हैं। वर्तमान में उनका परिवार देहरादून के मयूर विहार में निवास करता है। 22 वर्षीय मीनल ने अपनी शुरुआती पढ़ाई चंबा से की।
उन्होंने वर्ष 2018 में दसवीं की परीक्षा 91.4 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की। इसके बाद उनका परिवार देहरादून शिफ्ट हो गया। मीनल ने इंटरमीडिएट DAV Public School Dehradun से 98 प्रतिशत अंकों के साथ पास किया। इसके बाद उन्होंने Graphic Era University से बीएससी फिजिक्स ऑनर्स और DAV PG College Dehradun से एमएससी की पढ़ाई पूरी की।
परिवार से मिला मजबूत सहयोग
मीनल नेगी के पिता Pritam Singh Negi टिहरी के डोबरा क्षेत्र में शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं, जबकि उनकी मां गीता नेगी गृहिणी हैं। मीनल का बड़ा भाई सॉफ्टवेयर इंजीनियर है और छोटा भाई जेईई की तैयारी कर रहा है।
संस्कारों और अनुशासन में पली-बढ़ी मीनल ने कड़ी मेहनत और लगन के दम पर यूपीएससी परीक्षा में यह बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
पहले प्रयास में असफलता, दूसरे में मिली सफलता
मीनल नेगी को पहले प्रयास में असफलता का सामना करना पड़ा था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहीं। दूसरे प्रयास में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए 66वीं रैंक हासिल कर अपने परिवार और प्रदेश को गौरवान्वित किया।
मीनल नेगी और शांभवी तिवारी की यह सफलता उत्तराखंड के युवाओं के लिए प्रेरणा बनकर सामने आई है और यह साबित करती है कि दृढ़ संकल्प, कड़ी मेहनत और अनुशासन के बल पर कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।







