मध्य-पूर्व तनाव का असर: उत्तराखंड में घरेलू गैस सिलेंडर की बुकिंग दोगुनी, कमर्शियल सिलेंडर की किल्लत ।

देहरादून/हल्द्वानी: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध जैसे हालातों का असर अब भारत की गैस आपूर्ति पर भी दिखाई देने लगा है। पश्चिम एशिया से एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) और क्रूड ऑयल की सप्लाई चेन प्रभावित होने के कारण देशभर में गैस को लेकर पैनिक की स्थिति बन गई है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस की कोई कमी नहीं है, फिर भी एहतियात के तौर पर लोग ज्यादा गैस सिलेंडर बुक कर रहे हैं। इसका असर उत्तराखंड में भी देखने को मिल रहा है, जहां घरेलू गैस सिलेंडर की बुकिंग लगभग दोगुनी हो गई है।

दरअसल, ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रहे तनाव को देखते हुए केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय ने गैस आपूर्ति को लेकर गजट नोटिफिकेशन जारी किया है। इसमें घरेलू गैस कनेक्शन धारकों को पर्याप्त गैस उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है, जबकि कमर्शियल गैस सिलेंडरों की आपूर्ति में कुछ दिक्कत आने की आशंका जताई गई है। हालांकि अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों को कमर्शियल गैस सिलेंडर प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराए जाने की बात कही गई है।

उत्तराखंड गैस एजेंसी एसोसिएशन के अध्यक्ष चमन लाल के अनुसार देहरादून जिले में सामान्य दिनों में रोजाना लगभग 18 से 20 हजार घरेलू गैस सिलेंडरों की बुकिंग होती थी, लेकिन वर्तमान हालातों में यह आंकड़ा 30 हजार से भी अधिक पहुंच गया है। अचानक बढ़ी मांग के कारण गैस एजेंसियों के सामने सप्लाई बनाए रखना चुनौती बन गया है।

चमन लाल ने बताया कि उनकी एजेंसी में पहले रोजाना करीब 300 गैस सिलेंडर की बुकिंग आती थी, जो अब बढ़कर 550 से अधिक हो गई है। इसके चलते गैस सिलेंडरों का स्टॉक तुरंत खत्म हो जा रहा है और बैकलॉग भी बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोग सिलेंडर खाली होते ही तुरंत बुकिंग कर रहे हैं, जिससे एजेंसियों पर दबाव बढ़ गया है।

उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि गैस वितरण को लेकर ऐसे नियम बनाए जाएं, जिससे एजेंसियों को जितनी सप्लाई मिल रही है, उतनी ही गैस उपभोक्ताओं को व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध कराई जा सके। उन्होंने बताया कि फिलहाल एजेंसी के पास आने वाला स्टॉक दोपहर एक बजे तक ही खत्म हो जा रहा है, जबकि पहले उनके पास रोजाना 300 से 400 सिलेंडर का अतिरिक्त स्टॉक मौजूद रहता था।

वहीं कमर्शियल गैस सिलेंडरों की स्थिति और भी गंभीर बनी हुई है। चमन लाल के अनुसार तीन मार्च से कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई लगभग बंद है, जिससे होटल, रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई होटल और ढाबे गैस की कमी के कारण बंद भी हो चुके हैं।

देहरादून के जिला पूर्ति अधिकारी केके अग्रवाल ने बताया कि खाड़ी देशों में बने हालातों के कारण गैस आपूर्ति कुछ हद तक प्रभावित हुई है, लेकिन आम जनता को परेशान होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने घरेलू गैस उपभोक्ताओं को प्राथमिकता के आधार पर गैस उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। देहरादून जिले में मौजूद करीब 7 लाख 81 हजार घरेलू गैस कनेक्शन धारकों को सबसे पहले गैस की आपूर्ति की जा रही है।

उन्होंने बताया कि गैस सिलेंडर की जमाखोरी रोकने के लिए 25 दिन का नियम लागू किया गया है। यानी कोई उपभोक्ता यदि आज गैस सिलेंडर लेता है तो वह अगली बुकिंग 25 दिन बाद ही कर सकेगा। बावजूद इसके लोग लगातार बुकिंग करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसके कारण कई बुकिंग रद्द भी की जा रही हैं।

फिलहाल कमर्शियल गैस सिलेंडर सामान्य उपभोक्ताओं को उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं, जबकि अस्पतालों, छात्रावासों और स्कूलों को प्राथमिकता के आधार पर गैस उपलब्ध कराई जा रही है। अन्य कमर्शियल गैस कनेक्शन धारकों को गैस उपलब्ध कराने को लेकर केंद्र सरकार ने तीनों गैस कंपनियों की एक कमेटी गठित की है, जो वर्तमान परिस्थितियों का आकलन कर आगे का निर्णय लेगी।

इधर कुमाऊं मंडल के आयुक्त दीपक रावत ने सभी जिलाधिकारियों को गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी रोकने के सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि गैस एजेंसियों, गोदामों और वितरण व्यवस्था पर कड़ी निगरानी रखी जाए, ताकि किसी भी तरह की अनियमितता या कालाबाजारी को समय रहते रोका जा सके।

कमिश्नर दीपक रावत ने चेतावनी दी है कि यदि कहीं भी गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी, ओवररेटिंग या वितरण में गड़बड़ी की शिकायत मिलती है तो संबंधित गैस एजेंसी या जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही अधिकारियों को नियमित निरीक्षण करने और उपभोक्ताओं की शिकायतों का त्वरित समाधान करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

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