जनपद के मोरी ब्लॉक के दूरस्थ फीताड़ी गांव में सोमवार देर रात भीषण आग लगने से 8 लकड़ी के भवन जलकर राख हो गए। आग इतनी विकराल थी कि घरों में रखा राशन, कपड़े, नकदी समेत सारा सामान जलकर खाक हो गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि घटना के समय ग्रामीण जाग रहे थे, जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई और आग अन्य मकानों तक फैलने से भी रोक ली गई।
जानकारी के अनुसार, देर रात अचानक फीताड़ी गांव में लकड़ी के बने मकानों में आग भड़क उठी। सूचना मिलते ही अग्निशमन विभाग, पुलिस, राजस्व विभाग और एसडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं और स्थानीय ग्रामीणों के साथ मिलकर आग बुझाने में जुट गईं। गांव की घनी आबादी और लकड़ी के मकानों के चलते आग तेजी से फैलने का खतरा बना रहा, लेकिन करीब सात घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया।
आपदा कंट्रोल रूम से मिली जानकारी के मुताबिक इस अग्निकांड में आठ भवन पूरी तरह जलकर नष्ट हो गए। साथ ही तीन गायों की भी जिंदा जलने से मौत हो गई है। आग लगने के कारणों का फिलहाल पता नहीं चल पाया है। आपदा प्रबंधन अधिकारी शार्दुल गुसाईं ने बताया कि गांव दूरस्थ क्षेत्र में होने और नेटवर्क की समस्या के कारण घटनास्थल की पूरी जानकारी जुटाने में समय लग रहा है।
घटना की सूचना मिलते ही कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने जिलाधिकारी को तत्काल मौके पर पहुंचने के निर्देश दिए। साथ ही आपदा प्रबंधन विभाग को प्रभावित परिवारों को जल्द से जल्द राहत सामग्री और सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
बताया जा रहा है कि जिन लोगों के मकान इस अग्निकांड में क्षतिग्रस्त हुए हैं, उनमें प्रेम सिंह, कुंदन सिंह, रविंद्र सिंह, उमशल सिंह, तिलक सिंह, नोनियाल सिंह समेत कई परिवार शामिल हैं। सभी प्रभावित परिवारों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है।
गौरतलब है कि मोरी ब्लॉक क्षेत्र में इससे पहले भी कई बार अग्निकांड की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। कुछ महीने पहले आराकोट क्षेत्र के डामटी थुनारा गांव में भी आग लगने से एक तीन मंजिला मकान जलकर राख हो गया था। वहीं, सट्टा गांव में हुए अग्निकांड में दो मकान क्षतिग्रस्त हुए थे और एक बुजुर्ग की मौत हो गई थी।
फिलहाल प्रशासन और राहत टीमें मौके पर डटी हुई हैं और प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।







