देहरादून: उत्तराखंड में वन और वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ-साथ अवैध खनन पर रोक लगाना वन विभाग के लिए लगातार बड़ी चुनौती बना हुआ है। इन चुनौतियों से निपटने के दौरान वनकर्मियों को कई बार तस्करों और खनन माफियाओं के साथ सीधे टकराव का सामना करना पड़ता है। ऐसे हालात में आधुनिक हथियारों और पर्याप्त सुरक्षा संसाधनों की कमी लंबे समय से एक गंभीर समस्या बनी हुई है। अब इन परिस्थितियों को देखते हुए वन विभाग वनकर्मियों को हथियारों से लैस करने की दिशा में ठोस कदम उठाने की तैयारी कर रहा है।
राज्य के कई वन क्षेत्र, खासकर पश्चिमी वृत्त, संवेदनशील माने जाते हैं। इन इलाकों में वन संपदा की तस्करी और नदियों में अवैध खनन के कई मामले सामने आते रहे हैं। कई बार हालात इतने बिगड़ जाते हैं कि वनकर्मियों और माफियाओं के बीच सीधा आमना-सामना हो जाता है। ऐसे में वनकर्मियों के पास या तो पुराने हथियार होते हैं या पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों का अभाव होता है, जिससे उनकी सुरक्षा पर खतरा बना रहता है।
इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने अब आधुनिक हथियारों और उपकरणों की खरीद की दिशा में पहल शुरू कर दी है। विभाग ने शासन को प्रस्ताव भेजकर 32 पिस्टल और राइफल जैसे हथियारों की मांग की है। प्रस्ताव में 32 पिस्तौल MK-II और 30.06 एसपी राइफल जैसे आधुनिक हथियार शामिल हैं। इसके अलावा अन्य जरूरी उपकरणों की भी मांग की गई है, ताकि वनकर्मी संवेदनशील क्षेत्रों में अधिक प्रभावी तरीके से काम कर सकें। इस पूरी खरीद के लिए करीब 59.41 लाख रुपये का बजट प्रस्तावित किया गया है।
वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में केवल पारंपरिक साधनों के सहारे काम करना मुश्किल होता जा रहा है। तस्कर और खनन माफिया कई बार संगठित तरीके से और हथियारों के साथ सामने आते हैं, ऐसे में वनकर्मियों को भी अपनी सुरक्षा और कार्रवाई के लिए आधुनिक संसाधनों की आवश्यकता है।
हालांकि केवल हथियारों की उपलब्धता ही एकमात्र चुनौती नहीं है। वनकर्मियों को हथियार देने की प्रक्रिया में लाइसेंस से जुड़ी जटिलताएं भी एक बड़ी समस्या रही हैं। वर्तमान व्यवस्था के तहत हथियारों के लाइसेंस जारी कराने में काफी समय और औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती हैं, जिससे जरूरत के समय हथियार उपलब्ध नहीं हो पाते। इसी समस्या को दूर करने के लिए वन विभाग अब नियमों में शिथिलता लाने की दिशा में भी काम कर रहा है। कोशिश की जा रही है कि पुलिस विभाग की तरह वन विभाग को भी हथियारों के लाइसेंस संबंधी कुछ अधिकार दिए जाएं, जिससे प्रक्रिया आसान और तेज हो सके।
वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि हाल के दिनों में वनकर्मियों के सामने कई चुनौतीपूर्ण घटनाएं आई हैं, लेकिन इसके बावजूद वे पूरी बहादुरी और समर्पण के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं। सरकार उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर है और हथियारों की आपूर्ति के साथ-साथ नियमों में जरूरी बदलाव करने पर भी विचार कर रही है।
हाल ही में एक घटना में वन विभाग के एक एसडीओ के साथ मारपीट का वीडियो भी सामने आया था, जिसमें खनन माफिया की संलिप्तता बताई गई। इसके अलावा कई मामलों में वनकर्मियों को बंधक बनाए जाने और तस्करों के साथ मुठभेड़ की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। इन घटनाओं ने विभाग के भीतर सुरक्षा को लेकर चिंता को और बढ़ा दिया है।
इन परिस्थितियों के चलते वनकर्मियों की ओर से भी लगातार मांग उठ रही है कि उन्हें अधिक अधिकार दिए जाएं और अत्याधुनिक हथियारों से लैस किया जाए। उनका मानना है कि जब तक उन्हें पर्याप्त सुरक्षा और कानूनी समर्थन नहीं मिलेगा, तब तक वे प्रभावी ढंग से माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर पाएंगे।
उत्तराखंड वन विभाग अब अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए वनकर्मियों को मजबूत और सुरक्षित बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यदि प्रस्तावित योजनाएं समय पर लागू होती हैं, तो इससे न केवल वनकर्मियों की सुरक्षा बेहतर होगी, बल्कि वन संपदा और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी।






